युवाओं और छात्रों में फैलाया जा रहा धर्मवाद का जहर देश के लिए घातक

एक दौर था जब देश का युवा आजादी के महानायकों के जीवन से प्रेरणा लेकर देश की विरासत को आगे बढाने और समस्याओं को दूर करने के संकल्प लेता था ।  स्कूल के दिनों में वह स्वतंत्रता संग्राम के नायको के जीवन को पढता था, देशभक्ति गीत सुनने के साथ ही खुद को देश सेवा के लिए तैयार करने की सौगंध खाता था । वह ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जैसे चरित्रों को पढ़कर ‘अपना कार्य स्वंय करो’ को अपनाता था, लेकिन अब  इक्कीसवीं सदी के भारत में जितनी तेजी से संचार क्रान्ति हुई है उसने देश की युवा शक्ति की दिशा को दूसरी ओर मोड़ने का काम किया है । पश्चिमी सभ्यता के हावी होते दौर में प्राइमरी स्कूल से लेकर कान्वेंट स्कूलों तक बच्चों को समाज, संस्कृति और सभ्यता से दूर किया जा रहा है ।
आजादी के महानायक या प्रेरणा देने वाले महापुरुषों के  जीवन -चरित्र पाठ्यक्रमो से गायब हो चुके हैं । इन्टरनेट के इस दौर में अब विद्यार्थियो को ऑनलाइन प्रोजेक्ट और तमाम तरह के कार्य दिए जा रहे है जो उनके भविष्य को सीमित कर देते हैं । इंटरमीडिएट और स्नातक तक आते आते देश की युवा पीढ़ी  Facebook और Whatsapp में व्यस्त हो चली है । समाज की अच्छी-बुरी चीजो पर चिंतन करने के लिए उसके पास वक्त नहीं है।  साथ ही हमारी नौजवान पीढ़ी में तेजी से धार्मिक भावनाएं बड़ी हैं, धार्मिक कट्टरता बड़ी है। आज का युवा देश के विकास, बेरोजगारी, शिक्षा, गरीबी , भुखमरी जैसी सामाजिक कुरीतियों से लड़ने के बजाय धार्मिक उन्माद की बाते करता है । कालेजों और स्कूलों में तेजी से धार्मिक भावनाएं बढ़ रही हैं । हालात तो यह हैं कि कालेजों में यदि दो धर्मो के छात्रों में मारपीट भी होती है तो उसे साम्प्रदायिकता का रूप दिया जा रहा है । उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में पूरे षड़यंत्र के तहत धार्मिक भावनाएं भड़काने और छात्रों को धार्मिक आधार पर बांटने की साजिशें चल रही हैं ।
देश के भविष्य के लिए युवा पीढ़ी और छात्रों में फैलाया जा रहा धर्मवाद का यह जहर बहुत घातक है, साथ ही हमारे सामाजिक ताने-बाने के लिए भी खतरनाक है। देश के सियासी दल जिस तरह से जातिवाद और धर्म के जहर को अपने राजनैतिक फायदे के लिए युवा पीढ़ी और समाज में घोल रहे हैं, किसी देशद्रोह से कम नहीं हैं।  वक्त रहते हम सबको इस दिशा में ठोस एवं आवश्यक पहल करनी होगी, चिंतन करना होगा अन्यथा ऐसा न हो कि देश की एकता, अखंडता क्षीण क्षीण हो जाये और हम हाथ मलते रह जाएँ।
राष्ट्रहित में आपसे चिन्तन-मनन करने की आशा के साथ…  
-जियाउर्रहमान
            संपादक