योगी सरकार के बजट में ‘ताज’ हुआ ‘मोहताज़’ !

ताजमहल एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। बीते महीने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने इसे भारतीय संस्कृति का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया था वहीं अब उनकी सरकार के बजट के चलते यह सुर्खियों में है। बीते मंगलवार को योगी आदित्य नाथ सरकार ने अपना पहला बजट पेश किया और बजट में ताजमहल का कोई जिक्र नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य के वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में “हमारी सांस्कृतिक विरासत” सेक्शन से ताजमहल नदारद है। 63 पन्नों के बजट में ताजमहल का कोई जिक्र नहीं है। बजट में स्वदेश दर्शन योजना पेश की गई है जिसके लिए 1,240 करोड़ रुपये अलॉट हुए हैं। योजना का उद्देश्य मथुरा, काशी और अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों पर पर्यटन बढ़ाने का है। ठीक ऐसे ही प्रसाद योजना के लिए 800 करोड़ रुपये अलॉट हुए हैं जिसके तहत अयोध्या, वाराणसी और मथुरा के इंफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप किया जाएगा। ऐसे में ताजमहल के लिए पैसा नहीं देने पर योग सरकार की कड़ी आलोचना हो रही है। हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में सेंटर फॉर ऑब्जेक्टिव रीसर्च एंड डेवलप्मेंट के अथर सिद्दीकी ने कहा, “संस्कृति की धर्म के चश्मे से पहचान करना यूपी की साझा विरासत के बिलकुल उलट है।” वहीं लखनऊ यूनिवर्सिटी के राजेश मिश्रा ने कहा, “किसी एक धर्म के लोगों की बढ़ाई और दूसरे धर्म के लोगों की बुराई करने की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।” मिश्रा ने सलाह दी कि राज्य सरकार को खुद को धर्म से बिलकुल अलग कर लेना चाहिए। वहीं बीएचयू के अध्यापक सोहन लाल ने कहा कि ताजमहल को धर्म के चश्मे से नहीं देखा जा सकता और कोई सरकार इसे नजर अंदाज नहीं कर सकती है।