..तो क्या नजीब का मुसलमान होना गुनाह है ! जरुर पढ़े CBI और मोदी सरकार को आईना दिखाता यह आर्टिकल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद नारा दिया था ‘सबका साथ-सबका विकास’, लेकिन उनके इस नारे की कलई धीरे धीरे खुलने लगी है | देश में उनके शासनकाल में जहां सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बड़ा है वहीँ कई मामलो में अल्पसंख्यको के प्रति देश की जिम्मेदार एजेंसियों ने भेदभाव किया है | डिजीटल इंडिया का सपना देखने वाली सरकार में देश की राजधानी की पुलिस तमाम सुविधाओं से लैस होने के बावजूद जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी से लापता छात्र नजीब का सुराग सितम्बर 2016 से अब तक नहीं लगा सकी है | इतना ही नहीं सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई को हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच दी गई लेकिन नतीजा अभी तक शून्य है |  राजनैतिक प्रतिशोध लेने के लिए सरकारों के मोहरे के रूप में कार्य करने वाली एजेंसी के लिए बदनाम होती जा रही सीबीआई ने नजीब के मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है जबकि बिहार से लेकर बंगाल तक विपक्ष के नेताओं के यहाँ छापेमारी करने में सीबीआई को देर नहीं लगती | नजीब प्रकरण में जेएनयू प्रशासन, दिल्ली पुलिस से लेकर अब सीबीआई की जांच में साफ़ साफ़ धर्म के आधार पर जांच में शिथिलता बरतने की बू आ रही रही है | नजीब की मां रो रो कर अब थक चुकी है, उसका देश की व्यवस्थाओं से मोहभंग हो चुका है |

अल्पसंख्यको और बुद्धजीवियों ने देशभर में नजीब की बरामदगी के लिए धरना प्रदर्शन किये और पीएम से एक मां को उसका बेटा वापिस लाने की गुहार तक लगाईं लेकिन अभी तक केंद्र सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है |  देश में सोशल मीडिया से लेकर अल्पसंख्यको में सवाल यही है कि क्या नजीब का मुसलमान होना गुनाह है ?

दरअसल नजीब के मामले में आरएसएस की अनुवांशिक संगठन  के ABVP के नेताओं की भूमिका मानी जा रही है | कई प्रत्यक्षदर्शियों ने तो अभाविप के नेताओं द्वारा नजीब से मारपीट करने की बाते कही थी लेकिन पुलिस ने इन बिन्दुओं पर कोई कार्य नहीं किया | माना जा रहा है कि अभाविप के नेताओं को बचाने के लिए नजीब प्रकरण में दिल्ली पुलिस से लेकर सीबीआई तक हीलाहवाली बरत रही है | हाईकोर्ट ने सीबीआई को फटकार भी लगाईं है और जांच में तेजी के निर्देश दिए हैं | अब देखना यह है कि सीबीआई जांच को कहा तक बढाती है ? क्या सीबीआई अपनी निष्पक्षता को बरकार रख नजीब की गुत्थी सुलझाएगी ? सवाल यह भी है कि राजनैतिक दवाब से हटकर सीबीआई बेबस मां को उसका बेटा लौटा पायेगी ?

नजीब के मामले ने एक बात तो स्पष्ट कर दी है कि अब देश में जांच और न्याय धर्म देखकर मिलेगा | नजीब की जगह यदि कोई नरेन्द्र इस तरह से लापता होता तो भी क्या दिल्ली पुलिस और जाँच एजेंसियां यही रुख अपनाती ? खैर,  भाजपा सरकार से देश में हजारो प्रदर्शन और हंगामो के माध्यम से नजीब की मां को उसकाबेटा  वापिस दिलाने की मांग की जा चुकी है लेकिन सबका साथ सबका विकास का नारा देने वाली सरकार अभी तक उसकी माँ को न्याय दिलाने में नकारा साबित हुई है | अल्पसंख्यको में नजीब के प्रकरण ने देश की व्यवस्थाओं के प्रति अविश्वास की स्थिति उत्पन्न कर दी है | नजीब के जिन्दा होने की उम्मीदें कम है लेकिन नजीब ने देश के सामने कई यक्ष प्रश्न छोड़ दिए हैं | अब देश की सरकार और व्यवस्थाओं को तय करना है कि वो धर्म-जाति के आधार पर न्याय देंगी या फिर न्याय की उम्मीद पाले एक बेबस मां को धोखा !

-लेखक जियाउर्रहमान व्यवस्था दर्पण के संपादक हैं |