दिल छू लेंगी डॉक्टर मानसी द्विवेदी की ये पंक्तियाँ- तुम..वादों में, रिश्तों में..सब तरह झूठे हो

लखनऊ | यूपी के अयोध्या से निकलकर देशभर में विख्यात कवयित्री डॉक्टर मानसी द्विवेदी की कवितायेँ आजकल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं | पढ़िए उनकी कुछ चंद पंक्तियाँ-

हमने कितने सच देखे इन आँखों से
खोकर सब आकाश,रहे बिन पाँखों से..
कितने शब्द बान झेले थे बातों से
घोर अकेलापन पाया था रातों से..
किश्तों में रिश्तों की क़ीमत क्या जानो
दुविधा में जीने की नेमत क्या जानो..?
भीतर-भीतर शौक़ अग़र मर जाये तो !
ज़िंदादिल ज़िंदा रहकर घबराए तो !
बन्द इमारत धू-धू कर जल जाए तो..
इंसा भीतर ही भीतर गल जाए तो !!
और..तुम केवल अनुमान लगाकर रूठे हो

तुम.. वादों में, रिश्तों में.. सब तरह झूठे हो।।

एक अरसा हुआ मन रहा अनछुआ
नित नए रंग बेशक़ लुभाते रहे।
मन मेरा पात पुरइन सा प्यासा रहा
कितने मौसम मुझे छू के जाते रहे।
बारिशें आईं आके चली भी गयीं
किंतु हमने किया आचमन तक नहीं…
यूँ तो वैराग्य धारा है तन ने मग़र

मन की ज़िद पर तुम्हें हम बुलाते रहे।।

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मुझको अपना ग़ुरूर प्यारा था,
उसको बस जी हुजूऱ प्यारा था,
उसकी ज़िद थी किसी टुकड़े पे सुलह कर लूं मैं..
मुझे पूरे का बस पूरा फ़ितूर प्यारा था।।

  • डॉक्टर मानसी द्विवेदी