इस रेखा के योग से पता चलता है व्‍यक्‍ति का स्वभाव

हृदय रेखा व्‍यक्‍ति के जीवन में बहुत कुछ बयां करती है। व्‍यक्‍ति का स्‍वभाव कैसा है, प्रेम में उसका नजरिया कैसा है, यह हृदय रेखा से तय होता है। हस्‍तरेखा विज्ञान में हृदय रेखा को लेकर बहुत से बातें कही गई हैं। यदि किसी व्‍यक्‍ति के हाथ में हृदय रेखा शनि क्षेत्र से शुरू हुई हो और सूर्य पर्वत तक पंहुच रही हो तो प्रेम में वासना होती है। ऐसा योग होने पर यह व्‍यक्‍ति पूरी तरह से स्वार्थी व्यवहार का हो जाता है। पं.शिवकुमार शर्मा के मुताबिक यदि हथेली में हृदय रेखा एक छोर से शुरु होकर दूसरे छोर तक जाए तो वह व्‍यक्‍ति वर्तमान में जीने वाले स्वभाव का होता है। ऐसे लोग सपनों की दुनिया से दूर रहते हैं और वास्‍तविक स्‍थितियों में अपना जीवनयापन करते हैं। हालांकि स्वभाव से ऐसे व्‍यक्‍ति भावुक एवं ईर्ष्‍यालु हो सकते हैं।

हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा दोनों एक छोर से शुरु होकर हथेली के दूसरे छोर पर तक जाए तो किसी की परवाह नहीं करने वाला स्वभाव हो सकता है। हृदय रेखा पतली हो। गहरी न होकर हल्की होने से स्वभाव रुखा हो सकता है। यदि हृदय रेखा गुरु पर्वत से शुरू होती है। तो यह दृढ़ निश्चयी और आदर्शवादी होने का संकेत है।

हृदय रेखा का लाल होना और अधिक गहरा होने से तेज स्वभाव को इंगित करता है। यह किसी बुरी आदत का शिकार भी बन सकते हैं। हाथ में दो हृदय रेखा हों, लेकिन उनमें किसी भी प्रकार का दोष न हो तो ऐसा व्‍यक्‍ति सात्विक बुद्धि वाला होता है। हृदय रेखा का मध्य में टूटना प्रेम संबंधो में बिखराव का प्रतीक है। हृदय रेखा तर्जनी उंगली के मूल से शुरू हो तो मानसिक रुप से परेशान रह सकते हैं। हथेली में हृदय रेखा न हो या बहुत छोटी हो तो यह प्रेम संबंधों में असफलता मिल सकती है।