हाथरस गैंगरेप केस : BJP के पूर्व विधायक के घर हुई सवर्णों की महापंचायत, आरोपियों को बताया निर्दोष

हाथरस | भाजपा के पूर्व विधायक राजवीर पहलवान के घर पर सर्व समाज की पंचायत में गैंगरेप प्रकरण में जेल भेजे गए सभी आरोपियों को निर्दोष बताया गया। इस मौके पर यूपी सरकार के पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने के फैसले का स्वागत भी किया गया। शहर स्थित पूर्व विधायक के आवास पर आयोजित महापंचायत में राजवीर ने कहा कि बीते 14 सितंबर को घटना के समय पीड़िता और उसकी मां ने थाना और जिला अस्पताल में घटना की सच्चाई के बारे में बताया, लेकिन पुलिस ने उनके बयानों को नजरंदाज कर दिया। पुलिस ने दबाव में आकर गैंगरेप जैसी धाराओं में लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।

पूर्व विधायक ने कहा कि हकीकत कुछ और ही है। इसके बारे में पूरा जिला जानता है। उन्होंने मीडिया पर भी नाराजगी जाहिर की। कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने सीबीआई जांच के आदेश दिये हैं। अब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। उन्होंने कहा कि एसआईटी के अधिकारियों से बातचीत हो चुकी है। वह आरोपी परिवारों का बयान दर्ज करेगी। इस मौके पर पूर्व विधायक ने चार वकीलों को एसआईटी के अधिकारियों से मिलकर पक्ष रखने की भी जिम्मेदारी सौंपी। पूर्व विधायक के बेटे मनवीर्र ंसह ने कहा कि पुलिस ने जिन लोगों को जेल भेजा है वे निर्दोष हैं। मेडिकल रिपोर्ट में कोई रेप की पुष्टि नहीं हुई है। मीडिया ने ट्रायल कर दिया और उन्हें फांसी के फंदे पर पहुंचाने की मांग कर डाली जोकि पूरी तरह से परिवारों के साथ अन्याय है।

भाजपा नेता रामवीर्र ंसह भैयाजी ने कहा कि मीडिया को सीबीआई जांच का इंतजार करना चाहिये। लोगों को लगता है कि चारों दोषी नहीं है। जांच में दोनों पक्षों को सुनना पड़ता है। महापंचायत के दौरान एक अधिवक्ता ने भाजपा सांसद पर तीखे कटाक्ष किये। महापंचायत में ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि सुमन्त किशोर सिंह, हेर्म सिंह ठेनुआ, रत्नेश चटर्जी, देवेन्द्र शर्मा, रितुपर सिंह राघव, अज्जू मियां,लक्ष्मी नारायण उपाध्याय,दिगम्बर सिंह सिसोदिया आदि मौजूद रहे। संचालन संतराज सिंह ने किया।

आरोपियों के परिजनों ने भी मंच से रखी बात-
महापंचायत के दौरान गैंगरेप में जेल गये चारों आरोपियों के परिजनों को बुलाया गया। सभी परिजनों ने मंच पर आकर पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया। उन्होंने मंच से साफ-साफ कहा कि अगर उनके बेटे दोषी है तो पुलिस चौराहा पर ले जाकर सीधे उन्हें गोली मार दी जाए। उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी, लेकिन उनके बेटों को निर्दोष होते हुए फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार के हिसाब से उनके बेटे अपना नार्को टेस्ट कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन पीड़ित परिवार नार्को टेस्ट से क्यों इंकार कर रहा है। जबकि डर उनके बेटों को होना चाहिये। अब खुद को पीड़ित बताने वाला परिवार सीबीआई जांच से भी इंकार कर रहा है।