#Aligarh: आँखों के मरीजों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाए उपलब्ध करा रहा AMU-प्रो तारिक मंसूर

अलीगढ़ | अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इंस्टीटयूट आॅफ आप्थलमाॅलोजी द्वारा डायबिटिक रेटीनोपैथी पर आयोजित सीएमई के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि के अमुवि का यह इंस्टीटयूट नेत्र रोगियों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि यह इंस्टीटयूट 1952 में स्थापित हुआ था और तब से लेकर आज तक इसकी सुविधाओं में निरंतर इजाफा हुआ है और इसने राष्ट्रीय स्तर पर न केवल अपनी पहचान बनाई है बल्कि नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में ख्याति भी अर्जित की है। प्रो. मंसूर ने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इस नेत्र चिकित्सा संस्थान का 1952 में उद्घाटन किया था और मिस्र के राष्ट्रपति जमाल अब्दुल नासिर, डाॅ.राजेन्द्र प्रसाद और डाॅ. एस राधा कृष्णन जैसी महान विभूतिया इस संस्थान का भ्रमण कर चुकी हैं। प्रो. मंसूर ने कहा कि अमुवि के इस नेत्र चिकित्सा संस्थान में समस्त अत्याधुनिक उपकरण और मशीने उपलब्ध हैं और यह संस्थान सभी सुपर स्पेशिलिटी में उच्च स्तरीय पीजी क्लीनिकल ट्रेनिंग और रिसर्च की सलाहियत रखता है। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सकों का दायित्व है कि वह इस संस्थान में प्रशिक्षण दें और मेडीकल छात्रों को अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति का एक चिकित्सक बनायें। प्रो. मंसूर ने चिकित्सकों से आव्हान किया कि वह आउटरीच कार्यक्रमों में भी सक्रिय रूप से भागेदारी करें और ग्रामीण क्षेत्रों विशेष कर अमुवि द्वारा गोद लिये पाॅच गांवों में जाकर रोगियों का उपचार करें। उन्होंने आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन नेत्र चिकित्सा संस्थान के शैक्षणिक उत्थान और हर प्रकार की सहायता के लिये प्रतिबद्व है। मानद् अतिथि सहकुलपति प्रो. तबस्सुम शहाब ने कहा कि अमुवि के जेएन मेडीकल काॅलेज में डिस्ट्रिक अर्ली इंटरवेंशन सेंटर की स्थापना हो चुकी है जो पूरे प्रदेश में अपने प्रकार का पहला केन्द्र है जहाॅ अतयाधुनिक चिकित्सा उपलब्ध है। प्रो. शहाब ने कहा कि अमुवि के जेएन मेडीकल काॅलेज में केवल प्रदेश से ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी लोग अपना उपचार कराने आते हैं और उन्हें बेहतर चिकित्सा उपचार कराना हमारा प्रथम दायित्व होना चाहिये। सहकुलपति ने इस बात पर बल दिया कि बच्चों की रेटीनो पैथी पर भी सीमएई आयोजित होनी चाहिये, क्योंकि जो नवजात शिशु दो किलोग्राम से कम वजन के जन्म लते हैं।

उनके भीतर अक्सर आंखों की शिकायत पैदा हो जाती है। फैकल्टी आॅफ मेडीसन के डीन और जेएनएमसी के प्रिन्सिपल व सीएमएस प्रो. एससी शर्मा ने कहा कि मधुमेह के रोगियों में जब शुगर का स्तर बढ़ता है तो उन्हें डायबिटिक रेटीनो पैथी हो जाती है। इन कोशिकाओं में सूजन हो जाती है और वह बन्द भी हो सकती हैं जिसके कारण रक्त का प्रवाह बन्द हो जाता है और आंखों की रोशनी कमजोर या पूरी तरह समाप्त हो जाती है। उन्होंने सीएमई के आयोजकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसके आयोजन से न केवल चिकित्सकों बल्कि रेजीडेंट डाॅक्टरों को भी बहुत लाभ होगा। वाइट्रो रेटीना सोसायटी आॅफ इण्डिया के कोषाध्यक्ष और शंकर नेत्र चिकित्सालय चैन्नई से पधारे डाॅ. प्रशांत बावनपुले ने कहा कि रेटीना को नुकसान पहुॅचने से पूर्व लेजर से या फोटो कोगुलेशन सामान्य तौर से नेत्र ज्योति को वापिस लाने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर रेटीना को ज्यादा नुकसान नहीं पहुॅचा है तो इसमें सर्जरी भी लाभदायक रहती है।

कार्यक्रम के आर्गेनाइजिंग चैयरमैन और नेत्र चिकित्सा संस्थान के निदेशक प्रो. सैयद नासिर असकरी ने कहा कि भारत में मधुमेह से प्रभावित रोगियों की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है और इस रोग से आर्थिक, सामाजिक और चिकित्सीय स्तर पर लोग प्रभावित हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में डायबेटालोजिस्ट, रेटीना स्पेशलिस्ट, नेफरोलोजिस्ट और कार्डियोवेस्कुलर स्पेशलिस्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।सीएमई के आयोजन सचिव डाॅ. अब्दुल वारिस ने कहा कि जेएनएमसी में डायबिटीज़ रेटीनोपैथी सेंटर के तौर पर काम करने की तमाम सुविधाऐं मौजूद हैं और जेएन मेडीकल काॅलेज के राजीव गांधी सेंटर फाॅर इंडोक्राइनोलोजी काफी लम्बे समय से बड़ी तादाद में मधुमेह रोगियों का उपचार कर रहा है। उपस्थितजनों का आभार प्रो. सीमी जकाउररब ने जताया और कार्यक्रम का संचालन डाॅ. नाहीद अख्तर ने किया। दिनभर चली इस सीएमई में दिल्ली से पधारे प्रो. बी घोष, डाॅ. अजय अरोरा, डाॅ. रोहन चावला, के अलावा डाॅ. प्रशांत और डाॅ. अमित गुप्ता ने भी व्याख्यान दिये।