प्रत्येक व्यक्ति को पढ़ना चाहिए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल- औरत का दिन !

इसमें कोई संदेह नहीं कि पुरुषों के साथ समानता के संघर्ष में स्त्रियों ने बहुत लंबा रास्ता तय किया है। वे अब मानसिक मजबूती, वैचारिक दृढता के साथ आर्थिक स्वतंत्रता भी हासिल करने लगी हैं। लेकिन यह लड़ाई अभी अधूरी है। स्त्रियों की असमानता की जड़ें पुरुषों पर आर्थिक निर्भरता के अलावा उनकी बेपनाह भावुकता में भी है। सदियों से पुरुष सत्ता उनकी इस भावुकता से खेलती रही है। झूठी तारीफें कर हजारों सालों तक दुनिया के तमाम धर्मों…

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पढ़िए पूर्व IPS ध्रुव गुप्त का आर्टिकल- 76 साल का अकेलापन !

साइबेरिया में घने जंगलों में एक इलाका है जिसके 150 किमी के दायरे में कोई इंसानी आबादी नहीं है। सर्दियों में वहां का तापमान – 50 डिग्री तक गिर जाता है। क्या ऐसे दुर्गम और कठिन इलाके में कोई व्यक्ति अकेला भी रह सकता है ? हाल में ऐसी ही एक औरत 76-वर्षीय अगफाया लाइकोवा का पता लगा है। 1936 में स्टालिन के धार्मिक उत्पीड़न से बचने के लिए रूस के कई परिवार यहां आकर बस गए थे। हालात…

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प्रत्येक नागरिक को जरूर पढ़ना चाहिए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल- इंदिरा जैसा कोई नहीं !

देश की राजनीति में पहली बार पुरूष वर्चस्व को चुनौती, निजी बैंकों और कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण, राजाओं के प्रिवी पर्स की समाप्ति, चीन के मुखर विरोध के बावजूद सिक्किम का भारतीय गणराज्य में विलय, पाकिस्तान के टुकड़े कर एक नए देश बांग्लादेश का निर्माण, भारतीय सेना के आगे लगभग एक लाख पाकिस्तानी सैनिकों का ऐतिहासिक आत्मसमर्पण, कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण रोकने के लिए पाकिस्तान के साथ अपनी शर्तों पर शिमला समझौता, विश्व भर के विरोध और प्रतिबंधों की…

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अमजद खान की पुण्यतिथि पर पढ़िए ध्रुव गुप्त का आर्टिकल- एक था गब्बर !

ध्रुव गुप्त- कोई अभिनेता किसी एक फिल्म से भी अमरत्व हासिल कर सकता है, हिंदी सिनेमा में इसका सबसे बड़ा उदाहरण मरहूम अभिनेता अमजद खान हैं। वैसे तो अमजद ने दर्जनों फिल्मों में खलनायक, सहनायक, चरित्र अभिनेता की विविध भूमिकाएं की, लेकिन याद उन्हें उनकी पहली फिल्म ‘शोले’ में गब्बर सिंह की भूमिका के लिए ही किया जाता है। हिंदी सिनेमा के दर्शकों ने किसी डाकू का इतना खूंखार, भयावह और नृशंस चरित्र न पहले देखा था और न…

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पढ़िए गोपालदास नीरज की पुण्यतिथि पर ध्रुव गुप्त का आर्टिकल- ऐ भाई, ज़रा देख के चलो !

स्व. गोपाल दास नीरज जी को उनके छंदबद्ध गीतों के लिए ही जाना जाता है, लेकिन विचित्र तथ्य यह भी है कि हिंदी सिनेमा में छंदमुक्त गीतों के प्रवर्तक भी वही थे। वह पहला छंदमुक्त गीत था राज कपूर की फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ का। राज जी को सर्कस के विदूषक की अपनी भूमिका में गाने के लिए कोई एक गीत चाहिए था जिसमें रफ़्तार भी हो, उदासी भी और जीवन-दर्शन भी। गीत की रचना के लिए बैठक जमी…

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भलो भयो विधि ना दिए शेषनाग के कान, धरा मेरू सब डोलते तानसेन की तान ! पढ़िए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल-

संगीत सम्राट तानसेन भारतीय शास्त्रीय संगीत के शिखर पुरुषों में एक रहे हैं। ग्वालियर के हजरत मुहम्मद गौस और वृंदावन के स्वामी हरिदास के शिष्य तानसेन सम्राट अकबर के दरबारी गायक और उनके नवरत्नों में से एक थे उनकी गायन प्रतिभा के बारे में ‘आईने अकबरी’ में इतिहासकार अबुल फज़ल ने कहा है – ‘पिछले एक हज़ार सालों में उनके जैसा गायक नहीं हुआ।’ उनके गहरे मित्र और भक्त कवि सूरदास ने उनके बारे में लिखा है – भलो…

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UP से बड़ी खबर, योगी सरकार ने 7 IPS के किए ट्रांसफर, देखें लिस्ट-

लखनऊ । उप्र की योगी सरकार ने रविवार को देर रात भारतीय पुलिस सेवा ( #IPS ) के सात अफसरों का तबादला कर दिया। इनमें ज्यादातर ऐसे हैं जो डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध थे और उन्हें पीएसी में सेनानायक के पद पर भेजा गया है। पूर्व में इन अफसरों को जिले के एसपी पद से हटाकर डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध किया गया था। डीजीपी मुख्यालय में एसपी कानून-व्यवस्था के पद पर तैनात कुंतल किशोर को सेनानायक 26वीं वाहिनी पीएसी…

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महाकवि दिनकर की पुण्यतिथि पर पढ़िए ध्रुप गुप्त का आर्टिकल- अपने समय का सूर्य हूं मैं !

रामधारी सिंह दिनकर हिंदी के उन गिनेचुने कवियों में एक थे जिनकी कविताओ में एक ओर ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रान्ति का तेज है तो दूसरी ओर कोमल श्रृंगारिक भावनाओं और प्रेम की इतनी कोमल अभिव्यक्ति जिसकी बारीकी पढ़ने वालों को स्तब्ध करती है। उनका ‘कुरुक्षेत्र’ श्रेष्ठ ओजपूर्ण काव्यों में और ‘उर्वशी’ श्रेष्ठ श्रृंगारिक काव्यों में शुमार होते हैं। दोनों काव्य रचनाएं उनके व्यक्तित्व के दो ऐसे ध्रुव है जिनके अंतर्संघर्ष की बुनियाद पर उनका विराट काव्य-संसार खड़ा है।…

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जमातियों को NSA के तहत जेल में बंद करके पढ़ने को मुहैया कराया जाए क़ुरआन शरीफ़ ! पढ़िए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल-

देश-दुनिया पर उपस्थित कोरोना संकट के बीच कानूनों और चेतावनियों की अनदेखी कर दिल्ली में सैकड़ों विदेशियों के साथ तब्लीगी जमात द्वारा आयोजित बड़ा जलसा मुझे मूर्खता के सिवा कुछ नहीं लगा था। जैसा कि जलसे में शिरक़त करने वालों को भरोसा दिलाया गया था, अल्लाह द्वारा उनकी सुरक्षा में तैनात सात हजार फरिश्तों में से एक भी उन्हें बचाने नहीं आया। देश भर में अबतक चार सौ से ज्यादा तब्लीगी कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं और दर्जन…

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कोरोना वायरस की चर्चा के बीच पढ़िए ध्रुव गुप्त का आर्टिकल- एक नज़र जेलों पर भी !

प्रधानमंत्री के देश को संबोधन में जो एक बात सबसे अच्छी लगी वह थी अपने को खतरे में डालकर कोरोना के विरुद्ध ज़रूरी लड़ाई लड़ रहे चिकित्सा, पुलिस, प्रशासन से जुड़े लोगों और सफाईकर्मियों के प्रति सम्मान प्रकट करने की भावुक अपील। कोरोना के खतरे के मद्देनज़र सामाजिक संपर्क को यथासंभव टालने की प्रधानमंत्री की अपील पर अमल ज़रूरी है। आश्चर्य बस इस बात का है कि देश के जेलों में बंद कैदियों की अनावश्यक भीड़ पर किसी का…

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