अटल की पुण्यतिथि पर पढ़िए ध्रुव गुप्त का आर्टिकल- गीत नहीं गाता हूं !

जनसंघ और भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति में अटल बिहारी बाजपेयी हिंदुत्व के एकमात्र उदार और समावेशी नेता थे जिनके मन में सभी धर्मों के प्रति आदर भी था और सबको साथ लेकर चलने की काबिलियत भी। लोगों ने उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुखौटा भी कहा और एक गलत विचारधारा के जुड़ा सही राजनेता भी, लेकिन यह भी सही है कि अपने दल में वे ऐसे एकमात्र शख्सियत थे जो संघ की विचारधारा की उपज होनेके बावजूद उससे इतर…

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अटल जी के जन्मदिवस पर पढ़िए आडवाणी का दर्द बयाँ करती कविता – ‘बेवफा’

अटल जी के जन्मदिवस पर आडवाणी जी का दर्द बयां करती यूपी के वरिष्ठ पत्रकार नवेद शिकोह की कालजयी रचना :- बेवफा : छोड़कर वो घोसला उड़ने के क़ाबिल हो गया, बेवफाओं में अब उसका नाम शामिल हो गया। शाख़ तक जाना चहकना मैंने सिखलाया जिसे, वो परिन्दा आसमां जाने के क़ाबिल हो गया। फूस के इक झोंझ में रहता था वो महफूज था, मौज की लालच में वो नादान ग़ाफिल हो गया। ज़िन्दगी जिसने दी उसको वो अकेला…

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