पढ़िए MP की उभरती कवयित्री अंकिता जैन ‘अवनी’ की दिल को छू लेने वाली ये चर्चित रचनाएं-

‘विदेश में’पटर-पटर अंग्रेजी बोलते लोगों में,जब कोई हिंदी भाषी मिल जाए,और हैलो, हाय के बीच में,नमस्ते सुनाई दे जाए,तो यूं लगेगा,कि हम पहुँच गये स्वदेश में,या देश आ गया विदेश में।जब विदेशी नदी को देख,माँ गंगा का स्मरण हो जाए,और माँ की स्तुति गाने को,मन श्रद्धा से भर जाये।तो ऐसा लगेगा,जैसे हम पहुँच गये वहाँ,मां के एक आदेश में,या माँ आ गई हो विदेश में।जब विदेशी खामोशी में,कोई देशी त्यौहार का शोरगुलयाद दिला दे,तो ऐसा लगेगा जैसे,अपने ही हों…

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