स्वाति मालीवाल आज तोड़ेंगी अनशन, मांगें मानने पर PM का जताया आभार

नई दिल्ली | बीते नौ दिनों से राजघाट पर अनशन कर रही स्वाति मालीवाल ने रविवार दोपहर दो बजे अनशन तोड़ने की घोषणा की है। शनिवार देर शाम मंच से उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हमारी ज्यादातर मांगें मान ली हैं। खासकर बच्चों के साथ दुष्कर्म के दोषियों को फांसी की सजा की मांग भी मानी गई है। स्वाति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार भी व्यक्त किया। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल बच्चों के साथ दुष्कर्म करने वालों को छह माह के भीतर फांसी की सजा के अलावा छह मांगों को लेकर अनशन कर रही हैं। इस पूरे अनशन के दौरान उनका वजन सात किलो घट चुका है। उन्होंने शाम तकरीबन सात बजे मंच से कहा कि आज केंद्र सरकार ने जो अध्यादेश पास किया है, उसकी प्रति मिली है। मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि केंद्र सरकार ने हमारी लगभग सारी मांगें मान ली हैं। इस अध्यादेश में साफ-साफ लिखा है कि हर हाल में बच्चे के साथ दुष्कर्म के दोषियों को छह माह में फांसी की सजा दी जाएगी। साथ ही यह भी लिखा है कि जो भी दुष्कर्म के मामले होते हैं, समयबद्ध तरीके से छह माह में उसकी कार्रवाई पूरी की जाएगी। देश भर में नये फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। इसके अलावा पुलिस की स्पेशल टीम बनाई जाएगी जो दुष्कर्म मामलों की जांच करेगी। इसके लिए जो भी संसाधन जरूरत होगी वो पुलिस को दिए जाएंगे। साथ ही यह साफ किया है कि जो भी प्रक्रिया हैं, वो तीन माह में पूरी हो जाएगी। स्वाति मालीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने लंदन से लौटकर सुबह कैबिनेट की बैठक बुलाई जिसमें यह सारे निर्णय लिए गए। मैं प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करती हूं। उन्होंने यह काम देशहित में काम किया है, इसकी मैं सराहना करती हूं। स्वाति मालीवाल ने कहा कि आजतक किसी आंदोलन में नौ दिन में इतनी बड़ी जीत मिलना शायद ही कभी हुआ है। यह स्वाति मालीवाल की जीत नहीं है, यह देश की बेटियों-बेटों और देश की निर्भयाओं की जीत है। प्रधानमंत्री जी ने हमारी बात मानी, इस देश के मन की बात मानी। स्वाति ने कहा कि मैंने यह निर्णय लिया है कि रविवार दो बजे अपना अनशन समाप्त करूंगी। यह अनशन तो खत्म होगा, लेकिन संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई छोटी लड़ाई नहीं है। हमें पूरे देश में चेतना जगानी होगी। वो चेतना जगाकर पूरे देश में यह आंदोलन पहुंचाना होगा। मैं देश के प्रधानमंत्री के सम्मान में यह अनशन तोड़ रही हूं। अगर ये मांगें तीन महीने में पूरी नहीं हुई तो यह अनशन दोबारा होगा। अनशन के दौरान स्वाति को लगातार लोगों का सहयोग मिला। राजनेताओं से लेकर फिल्मी दुनिया से जुड़े लोग उनका समर्थन करने समता स्थल पहुंचे। बड़ी संख्या में युवा वर्ग से लेकर महिलाएं तक उनके अनशन में साथ दे रहे थे।

शुक्रवार को केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिए गए शपथ पत्र की सूचना के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी उनसे अनशन खत्म करने को कहा था। आप विदेश यात्रा करके लौट आए हैं। मैं आपको बताते हुए बहुत दुःख महसूस कर रही हूं कि आपके पीछे फिर इस देश में बच्चियों के साथ दिल दहलाने वाले हादसे हुए हैं। 18 अप्रैल को छत्तीसगढ़ में 10 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई। 19 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के एटा में 11 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया। 20 अप्रैल को मध्य प्रदेश के इंदौर में आठ महीने की बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की गई। मैं नौ दिनों से अनशन कर रही हूं। मुझसे ये बच्चियों की खून में लथपथ चीखें नहीं सही जातीं। यदि कुछ दिन पहले आपने दिल्ली की आठ महीने, कठुआ की आठ साल और सूरत की 11 साल की बच्ची की चीखें सुन कुछ कड़े कदम उठाये होते तो शायद तीन दिनों में कुचली गई बच्चियां जिंदा होती। दिल्ली महिला आयोग पिछले 2.5 साल से आपसे व पूरी केंद्र सरकार से गुहार लगा रहा है कि देश में एक ऐसा सिस्टम बनाएं जिसमें छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वाले को छह माह में फांसी की सजा दी जाए। महिलाओं के खिलाफ यौन शोषण के सभी मामलों में छह महीने में सुनवाई खत्म करके दोषी को सख्त सजा मिले। दुष्कर्म की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए वहशी मानसिकता वालों के मन में डर पैदा करना जरूरी है।

-छह माह के भीतर बच्चों से दुष्कर्म करने वालों को फांसी की सजा के लिए कानून में संशोधन का अध्यादेश पारित हो।
-कानून में यह सुनिश्चित करें कि देश भर की सरकारें पुलिस में नियुक्ति तुरंत संयुक्त राष्ट्र के मानकों के हिसाब से करेंगी और पुलिस की जवाबदेही भी तय करेंगी।
-सालों से अटकी दिल्ली पुलिस की संसाधनों की फाइलों पुर तुरंत कार्यवाही, जिनमें 14000 कर्मियों की फाइल जो गृह मंत्रालय से पारित होकर वित्त मंत्रालय में रुकी हुई है तुरंत पारित हो। साथ ही लगभग 40,000 कर्मियों की फाइल जो गृह मंत्रालय में है उस पर केंद्र सरकार समयबद्ध योजना घोषित करे।
-देश भर की पुलिस के लिए बनाए जा रहे सॉफ्टवेयर के पूर्ण रूप से संचालन की तुरंत समय सीमा तय हो।
-देश भर में फास्ट ट्रैक कोर्ट बढ़ाए जाएं, इसके लिए केंद्र रूपरेखा बताए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार दिल्ली में संचालित व प्रस्तावित फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के लिए केंद्र सरकार अपने हिस्से का 50% फंड प्रदान करे जो पांच साल से नहीं दिया गया है।
-दिल्ली में एक उच्चस्तरीय समिति तत्काल गठित की जाए जिसमें गृह मंत्री, उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, महिला आयोग और पुलिस कमिश्नर शामिल हों जो हर महीने देश की राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा का जायजा ले।