सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन की जमानत को किया खारिज़

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस कर्णन को ज़मानत  देने से इनकार  कर दिया है। कोर्ट ने उन्हें सुनाई गई 6 महीने की जेल की सजा को भी सस्पेंड करने से इनकार कर दिया। बता दें कि मंगलवार को पुलिस ने उन्हें कोयंबटूर से गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना के मामले में उन्हें 6 महीने की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने 9 मई को कर्णन की गिरफ्तारी के ऑर्डर दिए थे। इसके बाद वह 12 जून को रिटायर हो गए। उनके वकील ने सुप्रीम कोर्ट से ऑर्डर रद्द करने और राहत की गुहार लगाई थी। वे 42 दिन से गायब थे। कर्णन की जमानत के लिए उनके वकील ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने यह पिटीशन खारिज करते हुए कहा, “सात जजों की बेंच पहले ही ऑर्डर पास कर चुकी है और अब इस पर सिर्फ स्पेशल बेंच ही सुनवाई कर सकती है।”

बता दे कि  जस्टिस कर्णन ने इसी साल 23 जनवरी को पीएम को लेटर लिखकर 20 जजों पर भष्ट्राचार का आरोप लगाया था। इनमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और मद्रास हाईकोर्ट के मौजूदा जज शामिल हैं। जस्टिस कर्णन ने इस मामले की जांच कराने की भी मांग की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 8 फरवरी को जस्टिस कर्णन को नोटिस जारी करके पूछा था कि क्यों न इसे कोर्ट की अवमानना माना जाए। कोर्ट ने उन्हें मामले की सुनवाई होने तक सभी ज्यूडिशियल और एडमिनिस्ट्रिेटिव फाइलें कलकत्ता हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को लौटाने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन को 13 फरवरी को कोर्ट में पेश होने को कहा था, लेकिन वो हाजिर नहीं हुए।  यह पहला केस था जब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के मौजूदा जज को अवमानना का नोटिस भेजा था |