शीत सत्र: तीन तलाक पर विधेयक लाने वाली है केन्द्र सरकार!

नई दिल्ली। सूत्र बतातें हैं कि केंद्र सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाने के मकसद से विधेयक लाने पर विचार कर रही है। मंगलवार को इसके संकेत दिए गए हैं। सरकार ने इस नए कानून का प्रारूप बनाने के लिए मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया है। इस समिति को तलाक पर रोक लगाने के लिए नए विधेयक का प्रारूप तैयार करने या मौजूदा कानून में जरूरी संशोधन का सुझाव देने की जिम्मेदारी सौप दी गई है।
कहा जा रहा है कि सरकार ऐसा कानून बनाएगी, जिससे मुस्लिम महिलाओं को तलाक-ए-बिद्दत की व्यवस्था से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी। मौजूदा समय में ठोस कानून नहीं होने से मुस्लिम पति बड़ी आसानी से तीन तलाक दे देते हैं और महिलाएं कुछ नहीं कर पाती हैं। अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक पर रोक लगाते हुए सरकार को कानून बनाने की सलाह दी थी।

सामान्य हालात में संसद का शीतकालीन सत्र नवंबर में शुरू होता है और करीब एक माह बाद खत्म होता है। विपक्ष आशंका जता रहा है कि सरकार इतिहास में पहली बार ऐसा कर सकती है कि शीतकालीन सत्र बुलाया ही नहीं जाये। विपक्ष के आरोपों के बीच संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने कहा कि सरकार शीतकालीन सत्र दिसंबर में बुलाएगी। तारीखों का ऐलान बाद में किया जाएगा। शीतकालीन सत्र को टालने के विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कुमार ने कहा कि यूपीए सरकार में 2008 और 2013 में शीतकालीन सत्र दिसंबर माह में बुलाया गया था।

केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि कांग्रेस हमें संसदीय लोकतंत्र पर उपदेश न दे। आपातकाल में जिस कांग्रेस ने संसद में ताला डाला, वहीं हमें संसदीय लोकतंत्र पर उपदेश दे रही है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा था कि मोदी सरकार गलतफहमी का शिकार है।
मोदी ब्रह्मा हैं, वही रचयिता भी, सिर्फ वही जानते हैं कि संसद कब शुरू होगा। मैंने कई मंत्रियों और लोकसभा स्पीकर से बात की है, लेकिन किसी को भी सत्र की तारीखों की जानकारी नहीं है।
रफाल सौदे में गड़बड़ियों, जीएसटी को लागू करने में नाकामी, रोजगार देने में विफलता और किसानों पर संकट के सवालों से बचने के लिए सरकार सत्र बुलाने से भाग रही है। मोदी सरकार चुनाव कराने वाली मशीन बनकर रह गई है।