शरीर की जरुरत है नींद, यह हैं अच्छी नींद लेने के फायदे

नींद सेहत का जरूरी हिस्सा है। कहते हैं इंसान दिन में बेहतर काम तभी कर सकता है जब रात को उसे पूरी नींद मिले। मगर आज की भागती दौड़ती जिंदगी ने इंसान की नींद चुरा ली है। लेट नाइट ड्यूटी, काल सेंटर, बीपीओ सेक्टर में काम करने वाले लोगों को अच्छी नींद नहीं मिल पाती। अच्छी सेहत और बेहतर दिनचर्या के लिए सात−आठ घंटे की नींद जरूरी है। कई लोग अच्छी नींद को ऐशो−आराम का दर्जा देते हैं मगर ऐसा नहीं है। यह आपके शरीर की जरूरत है। अगर आपकी नींद में बार−बार खलल पड़े, तो अगले दिन खुद को फ्रेश महसूस नहीं करेंगे। पूरे दिन चिड़चिड़ापन बना रहेगा। थकान भी महसूस होगी। नींद की जरूरत इंसान को सिर्फ तरोताजा रहने के लिए ही नहीं होती बल्कि इसके और भी कई फायदे हैं। अच्छी नींद आपकी एकाग्रता, याददाश्त, काम की उत्पादकता और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करती है। अच्छी नींद स्वस्थ्य तरोताजा रखने के साथ आपको आकर्षक बनाने में भी मदद करती है। कई लोग नींद पूरी न लेने की वजह से मोटापे के शिकार भी हो जाते हैं। महिलाओं पर किए गए सर्वे के मुताबिक जो महिलाएं सिर्फ चार−पांच घंटे की नींद लेती थीं, उनमें उन महिलाओं की तुलना में ज्यादा वजन पाया गया, जो सात−आठ घंटे की पूरी नींद लेती थीं।

एक सर्वे में यह बात उभर कर आई है कि पिछले एक दशक में लोगों में नींद का समय सात−आठ घंटे से कम होकर सिर्फ पांच−छह घंटे ही रह गया है। इसके कई कारण बताते गए हैं। जिनमें से कुछ कारण हैं− मोबाइल फोन का ज्यादा प्रयोग, ई−मेल, मैसेजिंग, ऑनलाइन शापिंग और चैटिंग वगैरह। देर रात टीवी और इंटरनेट पर चिपके रहने से भी समस्या बढ़ी है। कई मामलों में नींद का संबंध उम्र से भी है। 50 साल से ऊपर के लोगों में नींद कम होते देखा गया है पर यह बात हर व्यक्ति पर लागू नहीं होती। कई ऐसे महिला−पुरुष हैं, जो 50 साल से ऊपर हैं मगर वे सात−आठ घंटे की अच्छी नींद लेते हैं पर कई बुजुर्ग ऐसे भी हैं, जिन्हें करीब पांच−छह घंटे ही नींद आती है। जैसे−जैसे उम्र बढ़ती है हर व्यक्ति में नींद से जुड़ा प्राकृतिक बदलाव आता है। हर व्यक्ति को अच्छी नींद के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ता है। कई लोग जो दिन में सो जाते हैं या शाम को सो लेते हैं, उन्हें भी रात में जल्दी नींद नहीं आती।
उम्र के साथ−साथ नींद तो कम होती ही है पर दिन भर की शारीरिक मेहनत पर भी आपकी नींद निर्भर होती है। जैसे−जैसे उम्र बढ़ती है, शारीरिक मेहनत भी कम होती है, घर से बाहर आप कम समय बिताते हैं, आपका खान−पान प्रभावित होता है। बीमारी के कारण दवाइयां ज्यादा खानी पड़ती हैं, जिस कारण नींद पर असर पड़ता है। कई लोग रात में खर्राटे लेते हैं, जिस कारण उनके पास सोने वाला व्यक्ति अच्छी नींद नहीं ले पाता। कई लोग अच्छी नींद के लिए अल्कोहल का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी नींद उड़ जाती है। कई बार बीमारी के कारण भी नींद नहीं आ पाती। जैसे आर्थराइटिस का दर्द, डायबिटिज, डिप्रेशन और बेचैनी वगैरह। यानी जीवन में सब सुकून न हो तो नींद आसानी से नहीं आती। कई महिला−पुरुष पैरों में दर्द के कारण भी सोते−सोते उठ जाते हैं और उन्हें टहलना पड़ता है। पैरों में पड़ने वाले क्रैंप के कारण भी नींद से जागना पड़ता है और यह दर्द जल्दी खत्म भी नहीं होता। गलत खानपान और हार्मोनल बदलाव खासकर लेपटिन और ग्रेलीन (पाचन क्रिया के हार्मोन) के कारण भी नींद आने में दिक्कत होती है। नींद की कमी न सिर्फ आपकी शारीरिक क्षमता बल्कि मस्तिष्क की क्षमता को भी प्रभावित करती है। मस्तिष्क के हाइपो−थैलेमस में मौजूद न्यूरॉन के समूह को भी यह प्रभावित करती है। कुछ बातों को अगर ध्यान में रखा जाए, तो अच्छी नींद आ सकती है। जैसे आप एक टाइम−टेबल बनाएं और उसका हर दिन ईमानदारी से पालन करें। यहां तक कि छुटि्टयों में भी। दिन में झपकी लें। शाम के बाद अल्कोहल का सेवन न करें। सोने से पहले बहुत ज्यादा खाना न खाएं और न ही खाली पेट सोएं। हमेशा सोने से दो घंटे पहले हल्का भोजन लें। खाने के बाद थोड़ा टहल लें।
अगर आप दवाइयां लेते हैं तो डॉक्टर से पूछकर इन्हें शाम की बजाय सुबह लें। शाम को ऐसी दवाई लें, जिससे नींद आती हो। सोने से तीन−चार घंटे पहले कोई भी व्यायाम न करें। रात में स्मोकिंग, चाय और कॉफी का इस्तेमाल न करें। इससे नींद आने में परेशानी होती है। अगर आप किसी बीमारी के कारण ठीक से सो नहीं पा रहे, तो बेहतर यही होगा कि उसका जल्द से जल्द इलाज कराएं। अगर आपको सोने में कोई परेशानी है, तो दिन में झपकी लेना न भूलें क्योंकि यह आपके दिमाग को दुरुस्त रखेगी और शरीर को भी ऊर्जा देगी। इससे आपका मूड भी ठीक रहेगा जिससे आप अपना काम ठीक से कर पाएंगे।