सहारनपुर : भीम आर्मी के ‘रावण’ से नहीं हो सकी जिग्नेश की मुलाकात, दलित सियासत उफान पर

आकाश पाण्डेय/मेरठ | गुजरात चुनाव से तेजी से देशभर की युवा राजनीति में चमके जिग्नेश मेवाणी ने सहारनपुर पहुंचकर भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ़ रावण से मिलने की कोशिश की लेकिन जेल प्रशासन से अनुमति न मिलने के चलते उन्हें वापिस लौटना पडा | भीम आर्मी के संस्थापक और जिग्नेश की मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं | दोनों नेताओं के ही देशभर के दलितों में तेजी से पहचान बने है और लोग उन्हें पसंद कर रहे हैं | महाराष्ट्र से लेकर यूपी तक दलित सियासत उफान पर हैं |

मंगलवार को दिल्ली में हुई युवा हुंकार रैली एवं जनसभा में भीमा कोरेगांव के मामले के साथ विधायक जिग्नेश मेवाणी एवं कन्हैया ने सहारनपुर हिंसा एवं चंद्रशेखर पर मुकदमे लगाकर जेल भेजने का मुद्दा उठाया था। सहारनपुर से हजारों की संख्या में भीम आर्मी केे कार्यकर्ता भी शामिल हुए। युवा हुंकार रैली के बाद विधायक जिग्नेश मेवाणी बुधवार को सुबह सीधे सहारनपुर पहुंचे। विधायक जिग्नेश मेवाणी गुपचुप तरीके से सुबह 11 बजे जिला कारागार पहुंचे और जिला कारागार में सहारनपुर हिंसा के आरोपी भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण से मुलाकात के लिए अर्जी दी। उन्होंने जेल अधीक्षक से मुलाकात की और चंद्रशेखर से मुलाकात के लिए समय मांगा, लेकिन जिला जेल प्रशासन ने चंद्रशेखर से मुलाकात कराने से इंकार कर दिया। लगभग आधा घंटा तक जिला कारागार पर विधायक जिग्नेश मेवाणी रुके।

जेल प्रशासन से माँगा मुलाकात का समय –
विधायक जिग्नेश मेवाणी ने चंद्रशेखर उर्फ रावण से मुलाकात न हो पाने के बाद जेल प्रशासन को मुलाकात कराने के लिए एक प्रार्थना-पत्र दिया। जिसमें निवेदन किया गया कि जिला कारागार उन्हें मुलाकात का जो भी समय निर्धारित करे उन्हें बता दें। वह उसी दिन मुलाकात के लिए पहुंच जाएंगे।