मुसलमान का मतलब अपने वतन से मोहब्बत करना, पढ़ें इस तरह अयोध्या के हालात संभालने की कोशिश में जुटा संघ-

नई दिल्ली | अयोध्या पर आने वाले फैसले के मद्देनजर माहौल सामान्य बनाए रखने की कोशिश में जुटे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अब बड़े मुस्लिम चेहरों के जरिये भी मुसलमानों के बीच हालात सामान्य बनाए रखने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। इसकी जिम्मेदारी संघ परिवार को लेकर मुसलमानों के बीच गलतफहमी दूर करने का अभियान चला रहे मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के ऊपर डाली गई है।

वैसे तो मंच ने इस सिलसिले में देश भर के लिए कार्यक्रम बनाए हैं। प्रदेश में लखनऊ सहित पांच स्थानों पर ‘हुब्बल वतनी पैगामे अमन कांफ्रेंस’ के जरिये इस काम को करने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा अन्य कई छोटे-छोटे कार्यक्रमों और संपर्क के जरिये भी मुस्लिम से इस मुद्दे पर धैर्य, संयम और सौहार्द्र बनाए रखने की अपील करने की जाएगी।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की प्रदेश संयोजिका डॉ. शबाना आजमी बताती हैं कि पांचों सम्मेलन एक सप्ताह में कर लिए जाएंगे। लखनऊ में 8 नवंबर को छोटे इमामबाड़े में सम्मेलन होगा। इसके अलावा वाराणसी, मेरठ, बरेली और आगरा में इन सम्मेलनों को आयोजित किया जाएगा। सभी सम्मेलनों में मुस्लिम समाज के प्रभाशाली बुद्धिजीवी, विद्वान और आलम-ए-दीन तथा समाजसेवियों के जरिये मुसलमानों से इत्तेहाद के साथ अमन व सुकून बनाए रखने की अपील की जाएगी। साथ ही आग्रह किया जाएगा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार करें। जो फैसला आए उसका दिल से सम्मान करें। आग्रह किया जाएगा कि मंदिर-मस्जिद के नाम पर इंसानियत और आपसी भाईचारा नहीं बिगड़ना चाहिए। भाजपा का अल्पसंख्यक मोर्चा भी इस अभियान में सहयोग करेगा।

मुसलमान का मतलब अपने वतन से मोहब्बत करना-
बकौल डॉ. आजमी मुस्लिम मंच के इन सम्मेलनों में मुसलमानों को समझाया जाएगा कि वे मुसलमान का मतलब अपने वतन से मोहब्बत करना है। जब वतन से मोहब्बत करेंगे तभी पूरी तरह शांति आएगी। इसके लिए अपने देश के बुजुर्गों, नबियों और अवतारों की इज्जत करना मुसलमानों का फर्ज है। हर एक को अपने-अपने मजहब के अनुसार, इबादत करने का अधिकार है।

सारी दुनिया यह मानती है कि अयोध्या में ही श्रीराम का जन्म हुआ था। इसलिए इस पर विवाद खड़ा करने का कोई तुक नहीं है। फैसला यदि हिंदुओं के पक्ष में आए तो खुशी के साथ उसे स्वीकार करें। पर, यदि निर्णय मुस्लिमों के पक्ष में आए तो भी यह स्वीकार करते हुए कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में ही हुआ था पूरी भूमि मंदिर बनाने के लिए खुशी-खुशी सौ करोड़ से ज्यादा हिंदू भाइयों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्हें सौंप देनी चाहिए।