RSS ने भी माना : निजी स्कूलों में बड रहा बाजारवाद, शिक्षा में परिवर्तन की जरुरत

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख प्रो. अनिरुद्ध देशपान्डे ने सरकारी स्कूलों के लिए निजी स्कूलों को चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों में बाजारीकरण बढ़ रहा है। शिक्षा कैरियर का मुद्दा हो गई है वह ज्ञान व्यापी की जगह अर्थ व्यापी हो चुकी है। जबकि शिक्षा का मौलिक उद्देश्य मनुष्य की क्षमताओं का वर्धन करना है। हमें शिक्षा में परिवर्तन लाना होगा और इसे शिक्षा के अर्थशास्त्र की जगह शिक्षा को ज्ञान का शास्त्र बनाना होगा।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के सम्मलेन एवं संगोष्ठी ’शिक्षा समग्र व व्यापक’ विषय पर बोरा इंस्टिट्यूट ऑफ़ मनेजमेंट साइंसेज में बोलते हुए देशपाण्डे ने कहा कि भाषा हमारी संस्कृति की निर्देशक है, जो छात्रों में मौलिक चिंतन और खोज को विकसित करती है। आज हमारे देश में शिक्षा की तस्वीर उल्टी हो चुकी है कि प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक नहीं मिलते और महाविद्यालयों में छात्रों नहीं मिलते। इस गंभीर प्रश्न पर संगठनों समाज व सरकारों को व्यापक विचार विमर्श करना होगा। कार्यक्रम में मौजूद उत्तर प्रदेश के प्राविधिक एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा कि तकनीक आसान और सस्ती हो इसके लिए सरकार प्रयास कर रही है। नई तकनीक को समाज के अनुकूल बनाने प्राविधिक शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता कैसे बढे़ सरकार इस पर काम कर रही है। शिक्षा की गुणवत्ता व रोजगार एक दूसरे से जुडा विषय है, जब शिक्षा में गुणवत्ता होगी तो रोजगार भी आसानी से उपलब्ध हो सकेगे। हम साफ सुथरी और पारदर्शी व्यवस्था बना रहे है।

बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री अनुपमा जायसवाल ने इस दौरान शिक्षकों को अपने दायित्व के प्रति सजग रहने के लिए आगाह किया। वहीं सरकार की नीतियों व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए बेहतर सुधार के लिए सुझाव आमंत्रित किये। उन्होंने बताया कि आज प्राइवेट स्कूलों के प्रति अंग्रेजी को लेकर ही लोगों का रुझान बढ़ा रहा है इस को ध्यान में रखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग में भी हर ब्लॉक में पांच इंग्लिश मीडियम स्कूल खोलने का निर्णय किया है।