पढ़िए MP की उभरती कवयित्री अंकिता जैन ‘अवनी’ की दिल को छू लेने वाली ये चर्चित रचनाएं-

‘विदेश में’
पटर-पटर अंग्रेजी बोलते लोगों में,
जब कोई हिंदी भाषी मिल जाए,
और हैलो, हाय के बीच में,
नमस्ते सुनाई दे जाए,
तो यूं लगेगा,
कि हम पहुँच गये स्वदेश में,
या देश आ गया विदेश में।
जब विदेशी नदी को देख,
माँ गंगा का स्मरण हो जाए,
और माँ की स्तुति गाने को,
मन श्रद्धा से भर जाये।
तो ऐसा लगेगा,
जैसे हम पहुँच गये वहाँ,
मां के एक आदेश में,
या माँ आ गई हो विदेश में।
जब विदेशी खामोशी में,
कोई देशी त्यौहार का शोरगुल
याद दिला दे,
तो ऐसा लगेगा जैसे,
अपने ही हों विदेशीयों के भेष में,
या हम आ गये हों,
अपने प्यारे भारत देश में।

पढ़िए यह दूसरी रचना-

       "भारत"
  असंख्य जाति, असंख्य बोली
  असंख्य सभ्यताएं,
   असंख्य परंपराएं,
    जहाँ बसती हैं,
  वो मेरे देश भारत की हस्ती है
 जिसके पास अखंडता
 एकता औऱ नैतिकता
 की धरोहर हैं,
  गर्व हैं मुझे ऐसा भारत
  हम भारतीयों का घर हैं।
 जहाँ शांति, अहिंसा, प्रेम का
 राग गाया जाता हैं,
   वो विश्वगुरु मेरे दोस्तों,
   हमारा भारत ही कहलाता हैं ||

-लेखिका अंकिता जैन ‘अवनी’, मध्य प्रदेशग के अशोकनगर से हैं | अपनी कविताओं से आजकल चर्चाओं में हैं |