लालू यादव चारा घोटाले में दोषी करार, बोले- ‘जेल जाना मंजूर लेकिन घुटने नही टेकूँगा’

रांची। चारा घोटाले में फंसे राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू यादव और जगन्नाथ मिश्रा समेत इस केस के सभी 22 आरोपियों पर सीबीआई की विशेष अदालत ने फैसला सुनाते हुए लालू प्रसाद को दोषी करार दे दिया और जगन्नाथ मिश्र को बरी कर दिया गया। लालू यादव ने जेल जाते हुए इसे भाजपा के इशारे पर षड्यंत्र बताया है और कहा है कि वो नीतीश की तरह मोदी के सामने घुटने टेक देते तो अपने परिवार को बचा सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नही किया । उन्होंने कहा कि एक लालू को जेल भेजोगे हजार लालू पैदा होंगे ।

21 साल पुराने इस मामले में सीबीआई ने शुरु में 38 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इसमें 11 की मौत ट्रायल के दौरान हो गई चुकी है। दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए और निर्णय के पूर्व ही अपना दोष स्वीकार कर चुकें हैं। सीबीआई ने इस मामले में देवघर कोषागार से फर्जी बिल बना कर राशि की निकासी करने का आरोप लगाया था।
आपूर्तिकर्ताओं पर बिना सामान की आपूर्ति किए बिल देने और विभाग के अधिकारियों पर बिना जांच किए उसे पास करने का आरोप था। लालू प्रसाद पर गड़बड़ी की जानकारी होने के बाद भी इस पर रोक नहीं लगाने का आरोप लगाया गया था।

इस केस से जुड़ी यह हैं बड़ी बातें-
लालू यादव चारा घोटाले में पांच केस का सामना कर रहे हैं जिनमें से चार केस उनके खिलाफ लंबित है। जिस केस में सुनवाई होने जा रही है वह 1994 से 1996 के बीच देवघर जिला कोषागार से फर्वीवाड़े तरीके से निकाले गए 84.5 लाख रूपये से जुड़ा हुआ है। इस केस मे कुल बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और लालू यादव समेत 34 लोग आरोपी है। इससे पहले चाइबासा कोषागार से 37.5 करोड़ रूपये फर्जीवाड़े तरीके से निकालने के जुर्म में लालू यादव को पांच साल जेल और 25 लाख रूपये जुर्माने की सज़ा सुनाई जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2013 के दिसंबर में उन्हें जमानत दी थी। साल 2014 में झारखंड हाईकोर्ट ने इस आधार पर चार अन्य केस के ट्रायल पर रोक लगा दी थी कि जब किसी शख्स को एक केस में दोषी करार दे दिया गया है तो फिर उसे उसी केस में उसी गवाह और साक्ष्य पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया। जिसके बाद लालू यादव को उनके खिलाफ लंबित सभी चारा घोटाला केस में ट्रायल फेस करना होगा। शुक्रवार को लालू यादव ने इस बात पर जोर देते हुए कहा था कि चारा घोटाला केस का राष्ट्रीय जनता दल पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आरजेडी को उनके बेटे तेजस्वी और तेजप्रताप सफलतापूर्व नेतृत्व करेंगे।

इस मामले में लालू पहले भी गए हैं जेल-
लालू प्रसाद यादव और जदयू नेता जगदीश शर्मा को घोटाला मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद लोक सभा से अयोग्य ठहराया गया। चुनाव आयोग के नए नियमों के अनुसार लालू प्रसाद पर 11 साल तक लोक सभा चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
3 अक्टूबर 2013 को चारा घोटाले से ही जुड़े एक मामले में 37 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर लालू यादव को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई और उन पर 25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगा दिया गया। लालू यादव को रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद किया गया था। हालांकि दिसंबर 2013 में उन्‍हें कोर्ट से जमानत भी मिल गई थी, जिसके बाद उन्‍हें रांची की बिरसा मुंडा जेल से रिहा कर दिया गया।
1996 में उपायुक्त अमित खरे ने पशुपालन विभाग के दफ्तरों में छापेमारी की और इस घोटाले का पता लगाया। उन्होंने पता लगाया कि कुछ फर्जी कंपनियों द्वारा पैसों की हेराफेरी की गई है। उसके बाद 11 मार्च 1996 को पटना हाईकोर्टने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को इस घोटाले की जांच का आदेश दिया, हाईकोर्ट ने इस आदेश पर मुहर लगाई।
1996 में सीबीआई ने चाईबासा खजाना मामले में प्राथमिकी दर्ज की और 23 जून 1997 को सीबीआई ने आरोप पत्र दायर किया और लालू प्रसाद यादव को आरोपी बनाया। 30 जुलाई 1997 को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद ने सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण किया। अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा।
सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव की याचिका खारिज कर दी थी। साल 2000 में लालू के खिलाफ आरोप तय हुए और 2002 रांची की विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई शुरू की। 13 अगस्त 2013 को हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई कर रही निचली अदालत के न्यायाधीश के स्थानांतरण की लालू प्रसाद की मांग खारिज की। 30 सितंबर 2013 में लालू और मिश्र को दोषी ठहराया गया। 3 अक्टूबर 2013 को सीबीआई अदालत ने लालू यादव को पांच साल के कारावास की सजा सुनाई, साथ ही उन पर 25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। लालू यादव को रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद किया गया था और उन्हें दिसंबर में जमानत मिल गई थी।