हार के डर से भाजपा ने राजस्थान में काटे छह मंत्रियों और 68 विधायकों के टिकट, फिर भी सचिन और गहलोत से पार पाना मुश्किल

जयपुर। राजस्थान में भाजपा ने नामांकन के आखिरी दिन सोमवार को आठ प्रत्याशियों की सूची जारी कर सभी 200 प्रत्याशी घोषित कर दिए। पार्टी ने अपने 160 विधायकों में से 68 विधायकों के टिकट काट दिए और 92 विधायकों को फिर से मौका दिया।
जिनके टिकट काटे गए हैं, उनमें छह मंत्री भी हैं। इनमें से दो मंत्रियों के बेटों को टिकट दे दिया गया, जबकि चार मंत्री अब बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। राजस्थान में टिकट वितरण से पहले इस बात की चर्चा थी कि पार्टी सत्ता विरोधी लहर को थामने के लिए लगभग आधे विधायकों के टिकट काट सकती है और टिकट वितरण में यह संभावना लगभग सही साबित हुई।

हालांकि इतने टिकट काटकर नए चेहरों को उतारने का फैसला भाजपा के लिए अभी भी चुनौती बना हुआ है। राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत से पार पाना भाजपा के लिए मुश्किल बना हुआ है ।

जिन विधायकों के टिकट काटे गए हैं, उनमें से भी कई निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि इस बारे में स्थिति नाम वापसी के बाद स्पष्ट होगी कि पार्टी के कितने बागी चुनाव मैदान में रहते हैं। पार्टी के चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक गजेंद्र सिंह शेखावत का दावा है कि नाम वापसी के बाद बहुत कम नाम बागी के रूप में रह जाएंगे, अधिकतर बागियों को मना लिया जाएगा।

अभी तक 2884 मैदान में-
राजस्थान में सात दिसंबर को होने वाले चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का काम सोमवार को पूरा हो गया। शाम छह बजे तक 200 में से 172 सीटों पर 2884 प्रत्याशियों के नामांकन दाखिल किए जाने की सूचना आ गई थी।

सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट, मंत्री यूनुस खान, कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं कोटा राजपरिवार की बहू कल्पना राजे, कृृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी सहित कई बड़े नेताओं ने नामांकन दाखिल किए। अब मंगलवार को नामांकन पत्रों की जांच होगी और इसके बाद 21 व 22 नवंबर को नाम वापस लिए जा सकेंगे।