PM मोदी का जन्मदिन आज, देशभर से मिल रही बधाईयां, पढ़िए उनके बारे में यह जानकारी-

‘’आपने जो मुझे जिम्मेदारी दी है उसे पूरा करने में शरीर का प्रत्येक कण और समय का प्रत्येक क्षण सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए लगा दूंगा।‘’ वो आए तो सबने कहा आने दो देख लेंगे, उसने देखा तो सबने कहा देखने दो कोई फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन उसने जीत लिया तो सबने कहा भारतीय लोकतंत्र का इतिहास नेपोलियन हिटलर को देख रहा है। लेकिन इन सब बातों से बेपरवाह उसने वो पुरानी कहावत को सोलह आने सच साबित करके दिखाया कि ‘वो आया, उसने देखा और जीत लिया’।

सोलहवीं लोकसभा अपनी सोलहों कलाओं के साथ उस शख्स पर कुर्बान हो गई और 17वीं लोकसभा में तो उसने खुद को प्रधानमंत्री और निरंतर प्रधानमंत्री के दोराहे पर मूर्धन्य की तरह स्थापित कर दिया। पीएम नरेंद्र मोदी आज 69 साल के हो गए। 17 सितंबर ही के दिन सन् 1950 में उनका जन्म गुजरात के वडनगर में हुआ था। जिसके बाद तमाम झंझावतों से जूझते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरी बार लगातर देश की बागडोर संभाली। लेकिन सफलता के यह क्षण मोदी की झोली में एक दिन में आकर नहीं गिरे हैं। उसके लिए उन्होंने भारत की जनता का वो भरोसा हासिल किया है कि वही देश का भाग्य बदल सकते हैं। सवा सौ करोड़ के इस देश ने अपना भाग्य उस भाग्य विधाता के नाम कर दिया जिसे नरेंद्र मोदी कहते हैं। संघर्ष की गलियों में अपनी तकदीर की लकीरों को अपने हाथों से बनाने-बिगाड़ने वाला शख्स आज राजनीति की बुलंदियों पर खड़ा है। वो बता रहा है कि अगर हिम्मत हो और जूनून हो तो सारी कायनात आपकी मदद में जुट जाती है। 

बेबसी की गोद में दर्द की कठिनाईयों में जिसे जिंदगी ने लोरी सुनाई उस बच्चे की किस्मत में हिन्दुस्तान का भाग्य विधाता बनना लिखा है, ये किसको पता था। बचपन में नरेंद्र मोदी का परिवार काफी गरीब था और पूरा परिवार एक छोटे से घर में रहता था। उनके पिता वडनगर के रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते थे। नन्हें नरेंद्र भी अपने पिता का हाथ बंटाया करते थे। ये किसको पता था कि अपने कस्बे के रेलवे स्टेशन पर चाय लेकर दौड़ने वाले नन्हें कदमों के पीछे एक दिन सारा हिन्दुस्तान दिवानों की तरह भागेगा। दो जून की रोटी के भी जिसे लाले पड़ जाते थे, लेकिन कुदरत ने उसे लड़ने और जूझकर जीतने का जज्बा दिया था। उससे आज हिन्दुस्तान का साक्षत्कार हो रहा है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि आराम हराम है। मोदी ने अपनी गुजरात साधना में आराम को हराम बना दिया। बचपन में पीएम मोदी का सपना भारतीय सेना में जाकर देश की सेवा करने का था, हालांकि उनके परिजन उनके इस विचार के सख्त खिलाफ थे। बचपन से ही राष्ट्रभक्ति और देशसेवा की लालसा से वशीभूत नरेंद्र मोदी का झुकाव राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर हो गया। गुजरात में आरएसएस का मजबूत आधार भी था।

साल 1967 में 17 साल की उम्र में नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद में  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ली। इसके बाद 1974 में वे नव निर्माण आंदोलन में शामिल हुए। 1980 के दशक में वह गुजरात की बीजेपी ईकाई में शामिल हुए। 1988-89 में भारतीय जनता पार्टी की गुजरात ईकाई के महासचिव बनाए गए। नरेंद्र मोदी ने लाल कृष्ण आडवाणी की 1990 की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा के आयोजन में अहम भूमिका अदा की। इसके बाद वो भारतीय जनता पार्टी की ओर से कई राज्यों के प्रभारी बनाए गए। साल 1995 में उन्हें पार्टी ने और ज्यादा जिम्मेदारी दी। नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय सचिव और पांच राज्यों का पार्टी प्रभारी बनाया गया। इसके बाद 1998 में उन्हें महासचिव (संगठन) बनाया गया। 2001 में केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद मोदी को गुजरात की कमान सौंपी गई। लेकिन यहां भी पद संभालने के बाद गोधरा कांड जैसी चुनौतियां उनके सामने लगभग पांच महीने बाद ही आकर खड़ी हो गईं। इसके ठीक बाद फरवरी 2002 में ही गुजरात में मुसलमानों के खिलाफ़ दंगे भड़क उठे। इस दंगे में सैंकड़ों लोग मारे गए। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात का दौरा किया, तो उन्होंने उन्हें ‘राजधर्म निभाने’ की सलाह दी। लेकिन नरेंद्र मोदी को हवा बदलने का हुनर शुरू से आता है। अपने के उठते सवाल और विरोधियों के प्रहार को धता बताते हुए दिसंबर 2002 के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज कर नरेंद्र मोदी ने साबित किया कि गुजरात की जनता का विश्वास और भरोसा उन पर कायम है।

इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनावों में और फिर 2012 में भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी गुजरात विधानसभा चुनावों में जीती। 2012 में लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की, तब तक ये माना जाने लगा था कि अब मोदी राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करेंगे। 2004 से सत्‍ता से बाहर भाजपा ने 2013 में अटल-आडवाणी के दौर के बाद नए नेता के रूप में अपना चेहरा बनाया था। उस दौर में यह शायद पहला ऐसा मौका था जब भाजपा के किसी अध्यक्ष ने अपने टीम के गठन में इतने बड़े स्तर पर बदलाव किए थे। जिनमें 12 में से दस उपाध्यक्ष और सभी महासचिव नए थेl। छह साल पहले संसदीय बोर्ड से हटाए गए नरेंद्र मोदी को फिर बोर्ड में शामिल कर भाजपा ने अपने इरादे साफ़ जाहिर कर दिए थे। जिसके बाद मोदी को सेंट्रल इलेक्शन कैंपेन कमिटी का चेयरमैन बनाया गया। वो एकमात्र ऐसे पदासीन मुख्यमंत्री थे,  जिन्हें संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया था। याद कीजिए 2014 की मोदी की यात्राएं और सभाएं। भ्रष्टाचार के आरोपों से धूमिल मनमोहन के मंत्रिमंडल के मुकाबले उन्होंने राजनीति में अलादीन का चिराग रख दिया। गुजरात की चौहद्दी से निकले मोदी ने 2014 के चुनाव में उतरते ही एक इतनी बड़ी लकीर खींच दी थी जिसके सामने सब अपने आप छोटे हो गए थे। बीजेपी तो पहले भी जीत चुकी है लेकिन ऐसी जीत पहले कभी नहीं मिली। 182 की चौखट पर हांफने वाली बीजेपी अपने बूते बहुमत के आंकड़े को पार किया। एक चाय वाले ने भारतीय राजनीति के प्याले में तूफान ला दिया। दसों दिशाओं से आने वाली जीत मोदी की इस शख्सियत के सामने झुकती चली गई।

इस अदभुत जीत के विजेता बने मोदी गांधीनगर से दिल्ली चले आए और फिर दिल्ली से वाराणसी। उसी वाराणसी में मोदी ने गंगा को याद किया उनकी आराधना की गंगा आरती की, बाबा विश्वनाथ को नमन किया और नमन किया वाराणसी के मतदाताओं को जिन्होंने देश की सबसे बड़ी पंचायत के लिए मोदी को अपना नुमाइंदा चुना। ये मोदी का जादू है जो न तो परिलोक से आई किसी कहानी का नाम है न कल्पना की पगडंडी पर भटकती कोई अल्हड़ सी दास्तां। ये संघर्ष की भट्टी में तपकर निकली उस शख्सियत की बुलंदी है। जिसके पराक्रम ने 21वीं सदी की भारतीय राजनीति को उसकी मुट्ठी में कैद कर लिया। राम से आगे बढ़ चुकी बीजेपी आज विकास के अखाड़े में सारे विरोधियों को मोदी की बदौलत धूल चटा चुकी है। तभी तो मोदी को भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा महानायक कहा जाने लगा है। भाजपा को हिन्दी पट्टी की पार्टी माना जाता था। विन्धाचल के उस पार कर्नाटक में थोड़ी ताकत जरूर मिली थी। लेकिन सत्ता और भ्रष्टाचार के नाटक ने उसे भी तबाह कर दिया था। जब मोदी का अश्वमेध रथ घर्र-घर्र करते हुए आगे बढ़ा तो उसकी चाप से हिन्दुस्तान का मुकद्दर रचने चले नए सिंकंदर की जयजयकार सुनाई पड़ने लगी। 

2019 के नतीजों ने सिद्ध कर दिया कि जनता मोदी पर उठे हर सवालों को खारिज कर चुकी है और इतनी ही नहीं उन्हें हर सवाल का जवाब मान चुकी है। यह तो तय है कि मोदी तो मोदी हैं और मोदी जैसा कोई नहीं। मोदी भाजपा की आन हैं, शान हैं, ईमान हैं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के जनादेश की पहचान हैं। भाजपा को मिली इस विराट सफलता के मैन ऑफ द मैच नरेंद्र मोदी और कप्तान अमित शाह की जोड़ी पूरे देश में ऐसी दौड़ी की क्या भोपाल क्या जयपुर क्या बंगाल एक-एक कर सारे प्रदेश भाजपा की झोली में आकर गिरने लगे। जिसके बाद तो स्वागत कुछ ऐसा कि पुष्पहार, बंदनवार, तोरण द्वार, फूलों की बौछार और मुद्रा कुछ ऐसी की तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा। वर्तमान दौर में मोदी के करिश्मे ने देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को इतिहास की राजनीति का डब्बा बना दिया और गुजरती हुई सत्ता और आती हुई सत्ता के संधिस्थल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सियासी सफलता के साम्राज्य हो गए।