..तो हर दूसरे-तीसरे दिन पाकिस्तान में हिन्दू लड़कियों को बना दिया जाता है मुसलमान !

नई दिल्ली। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में करीब हर दूसरे-तीसरे दिन कोई न कोई ऐसा मामला सामने आ रहा है जिसमें किसी हिंदू लड़की का अपरहण करके उसे मदरसे में ले जाकर यह एलान कर दिया जाता है कि उसने स्वेच्छा से इस्लाम कुबूल कर लिया। एक ऐसा ही एलान गत बुधवार को सिंध के घोटकी जिले के भरचंडी इलाके में हुआ। रविवार को पानो अकील इलाके की मंदिर वाली गली से अपहृत की गई हिंदू लड़की निशा को बुधवार को अचानक भरचंडी के एक मदरसे में लाया गया और आनन-फानन घोषित कर दिया गया कि वह अपनी मर्जी से इस्लाम अपना रही है और उसका नया नाम सकीना है। इतना ही नहीं, उसकी ओर से यह भी कहलाया गया कि इस्लाम अपनाने के बाद उसने एक मुस्लिम युवक से निकाह भी कर लिया है।

निशा के पिता दीवान मल बेटी के अपहरण के बाद से ही उसके जबरन धर्मांतरण और निकाह की आशंका जता रहे थे। उन्होंने पुलिस के अलावा इलाके के रसूखदार मुसलमानों से भी गुहार लगाई, लेकिन हमेशा की तरह किसी ने नहीं सुनी। निशा को अगवा कर जबरन मुसलमान बनाने और उसका जबरिया निकाह कर देने की घटना पर सिंध के हिंदुओं के साथ कई मुसलमानों ने अवश्य विरोध करते हुए शर्मिंदगी का इजहार किया है। मानवाधिकार कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय कपिलदेव सिंधी ने कहा है कि निशा चंद दिन पहले तक हिंदू थी, लेकिन अब दुर्दांत मियां मिट्ठू ने उसे अगवा कर अपने मदरसे में मुसलमान बना दिया। अगर यह चाहते हैं कि पाकिस्तान सभी के रहने लायक बने तो जबरिया धर्मांतरण रोकें।

पत्रकार मुस्तफा जटोई ने सकीना बनी निशा के फोटो के साथ ट्वीट करके कहा है कि कोई मुझे बताएगा कि हिंदू समुदाय की केवल लड़कियां ही इस्लाम क्यों अपना रही हैं? कोई हिंदू लड़का ऐसा क्यों नहीं करता? इसी तरह पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी से जुड़े जफर शाह ने ट्वीट किया है कि क्या निशा को जबरन सकीना बनाना पाकिस्तान में हिंदुओं का संहार नहीं है? उन्होंने अपने ट्वीट में पार्टी की जानी-मानी नेता शेरी रहमान को भी टैग किया है। हैरानी यह है कि न तो शेरी रहमान ने इस शर्मानक घटना का संज्ञान लिया और न ही सिंध के मीडिया अथवा सियासी नेताओं ने।

सिंध के घोटकी जिले में ऐसे तमाम मौलवी-मौलाना सक्रिय हैं जिनका एकमात्र मकसद हिंदू लड़कियों को अगवा कर उनकी शादी मुस्लिम लड़कों से कराना है। इनमें सबसे कुख्यात नाम मियां मिट्ठू का है। कुछ समय पहले क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान ने उसे अपनी पार्टी तहरीके इंसाफ पार्टी में लेने की घोषणा की थी, लेकिन हिंदुओं के विरोध के चलते वह अपने फैसले से पीछे हट गए थे। इसके बावजूद मियां मिट्ठू का कुछ नहीं बिगड़ा। निशा के अपहरण के पीछे भी उसी का हाथ माना जा रहा है।

इलाके में उसका आतंक इतना है कि हिंदू उसके खिलाफ आवाज उठाने में भी हिचकते हैं। एक अनुमान के अनुसार बीते पांच माह में करीब दौ सौ हिंदू लड़कियों को अगवा कर उन्हें मुसलमान बनाने के साथ उनका जबरिया निकाह कराया गया है। पाकिस्तान में यदा-कदा ऐसी मीडिया रपटें आती रहती हैं जो यह बताती हैं कि सिंध में हिंदू दोयम दर्जे का अपमानजनक जीवन जीने को विवश हैं और उनकी लड़कियों को जबरन अगवा करने के सिलसिले ने एक बड़े धंधे का रूप ले लिया है, लेकिन न तो सिंध सरकार चेत रही है और न ही पाकिस्तान की केंद्रीय सत्ता। इस मामले में वहां की अदालतें भी बेहद खराब भूमिका निभा रही हैं। ऐसे एक्का-दुक्का मामले ही हैं जब किसी अदालत ने अगवा की गई हिंदू लड़की को उसके घर वालों को सौंपने के आदेश दिए हों। सिंध में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का शासन है और वह सेक्युलर भी मानी जाती है, लेकिन वह भी मियां मिट्ठू जैसे मौलानाओं के आगे बेबस दिखती है।