ऑर्बिटर सटीक चंद्रमा की सतह के बारे में दे रहा जानकारी

नई दिल्ली। चंद्रयान-2 मिशन भले ही पूरी तरह कामयाब न हो पाया हो। लेकिन चंद्रमा की सतह के बारे में ऑर्बिटर सटीक जानकारियां दे रहा है। विक्रम लैंडर अगर चंद्रमा की सतह पर उतरने में कामयाब हुआ होता तो कहानी कुछ और होती। लेकिन भले ही विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतर पाने में कामयाब हुआ हो चांद की सतह से 100 किमी ऊपर चक्कर लगा रहा ऑर्बिटर बेहद हाई रिजोल्यूशन वाली तस्वीरें इसरो सेंटर को भेज रहा है। इसरो ने इन तस्वीरों को शुक्रवार को देश और दुनिया से साझा किया।

ऑर्बिटर ने 100 किमी की ऊंचाई से बोगुस्लावस्की ई क्रेटर के कुछ हिस्सों की तस्वीरों को भेजा है जो चांद के दक्षिण ध्रुव वाले हिस्से में है। इसके साथ ही दूसरी तस्वीरों में चंद्रमा की सतह पर बोल्डर्स को देखा जा सकता है। इसके साथ ही कुछ ऐसे भी क्रेटर्स हैं जिनका व्यास 5 किमी से कम है। चांद की सतह से जिन बोल्डर्स की तस्वीरें आई हैं उनमें बोल्डर्स की ऊंचाई 1 से 2 मीटर के बीच है। इसरो सेंटर से जुड़े शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे चांद की सतह की बनावट को समझने में मदद मिलेगी।

ओएचआरसी इमेज, शुक्रवार यानि 5 सितंबर को प्रार्त की गई। ऑर्बिटर ने 14 किमी व्यास और 3 किमी गहराई वाले बोगुस्लावस्की ई क्रेटर की तस्वीर को भेजा है। बता दें कि जर्मन एस्ट्रोनॉमर लुडविग वॉन बोगुस्लावस्की के नाम पर इस क्रेटर का नामकरण किया था।

ओएचआरसी की खासियत ये है कि इसके जरिए चांद की सतह का क्षैतिज और लंबवत दोनों तरह से तस्वीरें ली जा सकती हैं। यह कैमरा पैनक्रोमेटिक बैंड यानि की 450- 800 एनएम में काम करता है। यह लंबवत और क्षैतिज दोनों दिशा में 100 किमी की कक्षा से तीन किमी लंबाई और चौड़ाई में बेहतर तस्वीरें ले सकता है।