प्रत्येक नागरिक को जरूर पढ़ना चाहिए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल- इंदिरा जैसा कोई नहीं !

देश की राजनीति में पहली बार पुरूष वर्चस्व को चुनौती, निजी बैंकों और कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण, राजाओं के प्रिवी पर्स की समाप्ति, चीन के मुखर विरोध के बावजूद सिक्किम का भारतीय गणराज्य में विलय, पाकिस्तान के टुकड़े कर एक नए देश बांग्लादेश का निर्माण, भारतीय सेना के आगे लगभग एक लाख पाकिस्तानी सैनिकों का ऐतिहासिक आत्मसमर्पण, कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण रोकने के लिए पाकिस्तान के साथ अपनी शर्तों पर शिमला समझौता, विश्व भर के विरोध और प्रतिबंधों की धमकी के बावजूद भारत का पहला परमाणु परीक्षण- आज यह सोच कर भी रोमांच हो आता है कि भारत में कोई एक ऐसी प्रधानमंत्री भी हुई थी जिसने देशवासियों को राष्ट्रीय गौरव की इतनी सारी वज़हें दी।

विपक्ष के सबसे प्रखर नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें दुर्गा कहा और देश ने उन्हें लौह महिला की संज्ञा दी। आपातकाल लागू करने के विवादास्पद फैसले को छोड़ दें तो देश में सरदार पटेल और लाल बहादुर शास्त्री के अलावा इंदिरा गांधी जैसा दृष्टिसंपन्न, प्रखर, ऊर्जावान, तेजस्वी और प्रगतिकामी नेता कोई हुआ भी नहीं। आज देश जिस तरह पाकिस्तान, चीन, आतंकवाद, बेरोजगारी, सांप्रदायिकता जैसे बाहरी और भीतरी शत्रुओं से घिरा है, उसमें इंदिरा जी जैसी एक सशक्त नेत्री की ज़रुरत शिद्दत से महसूस हो रही है।

शहादत दिवस (31 अक्टूबर) पर हमारी प्रियदर्शिनी इंदिरा की स्मृतियों को नमन !

-लेखक ध्रुव गुप्त, पूर्व आईपीएस और देश के वरिष्ठ स्तम्भकार हैं |