नीरव मोदी ने ज़िंदगी तबाह कर दी, सगी बहन और जीजा ने लगाई कोर्ट में ये गुहार-

नई दिल्ली। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से दायर दो मामलों में अब उसकी छोटी बहन और जीजा ने ही उसके खिलाफ गवाही देने का फैसला किया है। मुंबई स्थित स्पेशल कोर्ट ने गवाही के बदले उन्हें माफी देने की गुहार वाली एप्लीकेशन को मंजूर कर लिया। पिछले महीने ही नीरव की बहन पूर्वी मेहता और उनके पति मयंक मेहता ने कोर्ट के सामने एक आवेदन दाखिल किया था।

इसमें उन्होंने कहा था कि वे खुद को नीरव मोदी से दूर रखना चाहते हैं और उससे और उसकी सौदेबाजी से जुड़ी कुछ अहम और ठोस सबूत दे सकते हैं। गौरतलब है कि पूर्वी के पास बेल्जियम की नागरिकता है, जबकि उनके पति मयंक ब्रिटिश नागरिक हैं। दोनों की ओर से कोर्ट में कहा गया है कि नीरव मोदी की कथित आपराधिक गतिविधियों की वजह से उनकी निजी और पेशेवर जिंदगी में ठहराव आ गया है। उन्होंने कहा है कि वे ईडी की तरफ से दायर मनी लॉन्ड्रिंग के दो केसों में गवाह बनना चाहते हैं और कुछ ऐसे खुलासे कर सकते हैं, जो कि नीरव मोदी और बाकी आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में अहम साबित हो सकते हैं। बता दें कि पंजाब नेशनल बैंक से फर्जी अंडरटेकिंग के जरिए 6498.20 करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में नीरव मोदी और अन्य आरोपियों के खिलाफ सीबीआई और ईडी ने जांच बिठा रखी है। पूर्वी और मयंक को सीबीआई ने आरोपी नहीं बनाया, पर ईडी ने दोनों के नाम केस से जोड़े थे। दोनों के गवाह बनने पर ईडी ने कोई आपत्ति नहीं जताई है। हालांकि, किसी आरोपी कंपनी या संस्था के गवाह बनने पर प्रवर्तन निदेशालय ने ऐतराज जाहिर किया है।

पूर्वी और मयंक ने अपने आवेदन में कहा है कि वे कोरोनावायरस की वजह से लगे प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर लगे बैन की वजह से भारत नहीं आ पाए हैं, पर वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मजिस्ट्रेट के सामने भी अपने बयान दे सकते हैं। इससे पहले अक्टूबर में भी ईडी को दिए बयान में दोनों ने जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही थी। नीरव की बहन और जीजा के इस आवेदन पर मुंबई स्पेशल कोर्ट ने कहा कि आरोपी इस वक्त विदेश में हैं और उन्हें कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश हैं।इसके लिए अभियोजन पक्ष को उन्हें भारत लाने के की सुविधा देनी चाहिए, ताकि यहां वे कार्यवाही में जल्द से जल्द हिस्सा ले सकें। गौरतलब है कि ईडी ने कहा था कि पूर्वी के नाम से जुड़ी संस्थाओं और बैंक अकाउंट्स को भारत और विदेश में मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। पूर्वी के खिलाफ इंटरपोल ने एक रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया था, जबकि न्यूयॉर्क और लंदन स्थित उनकी संपत्तियों को ईडी ने अटैच कर लिया था।