सुप्रीम कोर्ट के जजों ने कहा – SC में सबकुछ ठीक नही, खतरे में लोकतंत्र’, न्याय के प्रति आमजन असहज !

नई दिल्ली । आजादी के 70 वर्ष बाद देश के इतिहास में पहली बार न्यायपालिका वो भी उच्चतम न्यायालय में गुटबाजी जनता के सामने आ गयी है ।  शीर्ष अदालत में शुक्रवार को पहली बार सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने मीडिया को संबोधितकर न्यायलय और लोकतंत्र पर सवाल खड़े किए ।

पहली बार अप्रत्याशित निर्णय लेते हुए न्यायमूर्ति चेलामेश्वर और तीन अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों ने उच्चतम न्यायालय के न्यायतंत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर शुक्रवार को प्रेस को संबोधित किया । न्यायमूर्ति चेलामेश्वर के अलावा न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ भी पत्रकार वार्ता में मौजूद रहे ।

सुप्रीम कोर्ट के दूसरे वरिष्ठतम न्यायमूर्ति चेलामेश्वर ने कहा कि हम नहीं चाहते कि 20 साल बाद कोई कहे कि चारों वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने अपनी आत्मा बेच दी थी, इसलिए हमने मीडिया से बात करने का फैसला किया है । भारत समेत किसी भी देश में लोकतंत्र को बरकरार रखने के लिए यह जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था सही ढंग से काम करे.’ उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी ।

न्यायाधीश जे. चेलामेश्वर ने श कहा कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ‘सही नहीं चल रहा’ और बहुत सी ऐसी चीज़ें हुई हैं जो नहीं होनी चाहिए थीं
कई बार उच्चतम न्यायालय के प्रशासन में सब कुछ सही नहीं होता और बहुत सी ऐसी चीज़ें हुई जो नहीं होनी चाहिए थी। आधार, अभिव्यक्ति की आजादी और जजों की नियुक्ति को लेकर नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन (एनजेएसी) को लेकर उन्होंने बेबाक राय रखी है ।

सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा लोकतंत्र और उच्चतम न्यायालय की व्यवस्था को ही कठघरे में लाने के बाद देश हतप्रभ है । आमजन न्याय के मंदिर में ही अन्याय की स्थिति से खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है । मोदी सरकार खुद को इस लड़ाई से फिलहाल अलग रखने की नीति पर चल रही है । विपक्ष ने लोकतंत्र और सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं । सुप्रीम कोर्ट की यह लड़ाई आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर दिखाई दे सकती है ।