नवजोत सिंह सिद्धू मंत्री रहेंगे या जेल जाएंगे, केस पर SC का फैसला सुरक्षित

नई दिल्ली | सिद्धू पर आरोप है कि उन्होंने पंजाब के पटियाला में 65 वर्षीय गुरनाम सिंह से सड़क पर मारपीट की थी। इसके बाद गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी। पंजाब सरकार के मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। गौरतलब है कि सन् 19़88 के रोडरोज केस में आरोपी हैं। इस मामले में मंगलवार को बहस करते हुए सिद्ध के वकील आरएस चीमा ने कोर्ट से कहा था कि उनके मुवक्किल का रोडरेज के बाद हुई गुरनाम सिंह की मौत से कोई वास्ता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के दो सीनियर जजों ​जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर और जस्टिस संजय किशन कौल की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। इस मामले में बीते 12 अप्रैल को पंजाब सरकार का पक्ष रख रहे वकील संग्राम सिंह सरोन ने कोर्ट के सामने कहा था कि इस मामले में सिद्धू के द्वारा खुद को बेकसूर बताने वाला बयान पूरी तरह से गलत है। पंजाब सरकार द्वारा अपना पक्ष रखने के बाद सिद्धू ने कहा था कि गुरनाम सिंह की मौत दिल की बीमारी से हुई थी। उन पर लगे आरोप मेडिकल रिपोर्ट पर आधारित नहीं हैं। न्यायालय के हर फैसले के लिए पूरी तैयार से तैयार हैं। पंजाब के पटियाला में 65 वर्षीय गुरनाम सिंह से सड़क पर मारपीट की थी। इसके बाद गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी।बता दें कि रोडरेज का यह मामला बीते 27 दिसंबर, 1988 का है।

सिद्धू पर आरोप है कि उन्होंने पंजाब के पटियाला में 65 वर्षीय गुरनाम सिंह से सड़क पर मारपीट की थी। इसके बाद गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए पटियाला के सेशन्स कोर्ट ने 22 सितंबर, 1999 को सिद्धू और उनके सहयोगी रूपिन्दर सिंह संधू को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। लेकिन पीड़ित परिजनों ने इस फैसले के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सिद्धू को आईपीसी की धारा 304 के तहत दोषी मानते हुए तीन साल की सजा सुनाई थी। लेकिन पीड़ित पक्ष ने इस मामले में सजा बढ़वाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। बड़ी बात यह है कि जिस पंजाब सरकार में​ सिद्धू मंत्री हैं वह खुद उनके खिलाफ कोर्ट में पैरवी कर रही है। सिद्धू ने कहा था कि उनकी पीठ में छूरा घोंपा गया है।