9 महीने की बच्ची पहुंची हाईकोर्ट !

9 महीने की इस बच्ची को जो भी देखता है, वो बस देखता नहीं रह जाता है। ये बच्ची अब हाईकोर्ट पहुंची गई है और मामला काफी गंभीर है, आप भी जानिए: ये बच्ची कोई और नहीं, बल्कि पंजाब के अमृतसर की रहने वाली चाहत है। सिर्फ नौ महीने की उम्र में ही इसका वजन 19 किलो है। मां बाप के पास पैसा नहीं कि इलाज करा सके। इसलिए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने बच्ची का इलाज कराने को हा​थ बढ़ाया। इलाज की जिम्मेवारी पीजीआई चंडीगढ़ को सौंपी गई है। मामले में पीजीआई ने हाईकोर्ट में जवाब भी दाखिल कर दिया है।  पीजीआई ने चाहत के इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही से इनकार किया है। पीजीआई ने कहा कि वे चाहत के लिए अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहे हैं और करीब दो लाख के टेस्ट फ्री में करवाए गए हैं। साथ ही पीजीआई चाहत के रहने व इलाज के लिए कोई पैसा नहीं ले रहा है। पीजीआई ने अपना जवाब दाखिल कर आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि चाहत को सही इलाज नहीं मिल रहा, यह बात बिलकुल गलत है। पीजीआई बच्ची को मुफ्त इलाज मुहैया करवाने के साथ ही सिस्टर इंस्टीट्यूट जो दिल्ली और बेंगलुरू में मौजूद हैं, उनसे इलाज के लिए मशविरा कर रहा है। पीजीआई ने अपने जवाब में आगे बताया कि चाहत को मुफ्त इलाज मुहैया करवाने के साथ ही रहने की व्यवस्था भी की है। इसके साथ ही इलाज में कोई कमी न रहे, इसलिए कुछ टेस्ट अपने दायरे से बाहर जाकर दिल्ली और बेंगलुरू से करवाएं हैं। सिक्वेंसिंग टेस्ट के लिए चाहत के ब्लड सैंपल को बेंगलुरू की लैबोरेटरी भेजा गया, जहां से इन्हें दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ जिनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी भेजा गया। रिसर्च के लिए टेस्ट की पूरी सुविधाओं को लेकर हाईकोर्ट की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में पीजीआई ने बताया कि सिक्वेंसिंग मशीन की अगली जनरेशन को पीजीआई लाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और जल्द ही यह मशीन पीजीआई में टेस्ट आरंभ कर देगी। पीजीआई ने बताया कि अभी तक बच्ची के पिता को 5 हजार का खर्च उठाना पड़ा है और बाकी का सारा खर्च और इलाज पीजीआई मुहैया करवा रहा है। इसके साथ ही जेनरिक टेस्ट की सुविधा भी पीजीआई में मौजूद नहीं है, जिसके लिए बेंगलुरू की लैब से संपर्क किया गया। इस टेस्ट के लिए 2.70 लाख का खर्च आता है। पीजीआई ने 35000 की लागत वाला टेस्ट करवाया, जिसके लिए लैब 15 हजार में तैयार हो गई।  5 हजार चाहत के पिता ने और 10 हजार एक एनजीओ ने दिया। इसके साथ ही दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ जिनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी ने 2 लाख लागत के टेस्ट फ्री में किए हैं। इसके साथ ही हाईकोर्ट की ओर से पूछा गया था कि गरीब लोगों को इस बारे में अवगत करवाने के लिए कोई व्यवस्था है। पीजीआई ने बताया कि पुअर पेशेंट असिस्टेंस सेल बनाया गया है, जो जरूरतमंद लोगों को इस बारे में अवगत करवाते हैं।

यह है मामला
जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू ने 19 किलो वजनी चाहत के मामले में संज्ञान ले पीजीआई की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए थे। चाहत के गरीब मां-बाप उसका इलाज करवाने में असमर्थ हैं। इस मामले के समाचार पत्रों में प्रकाशित होने पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था। बता दें कि, चाहत जब पैदा हुई थी, तब उसका वजन महज 2 किलो था। लेकिन धीरे-धीरे उसका वजन बढ़ने लगा और अब महज 9 महीनों में 19 किलों से अधिक की हो गई है।