मध्य प्रदेश में नर्मदा सेवा कार्य योजना जारी करेंगे प्रधानमंत्री

भोपाल | 09 मई (जनसमा)। नर्मदा सेवा की कार्य-योजना आगामी 15 मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जारी की जायेगी। नर्मदा नदी में न्यूनतम जल के प्रवाह के लिये कानूनी प्रावधान किया जायेगा।
यह जानकारी मुख्यमंत्री चौहान आज यहाँ नदी, जल और पर्यावरण संरक्षण मंथन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए दी।
चौहान ने कहा कि अब प्रदेश में कम पानी में ज्यादा सिंचाई के लिये ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम को बढ़ावा दिया जायेगा और नहरों से सिंचाई व्यवस्था को समाप्त किया जायेगा। प्रदेश की हर पंचायत में कम से कम एक जल संरचना बनाई जायेगी। नर्मदा तट के सभी निकायों की भागीदारी के लिये उनके द्वारा सीवरेज को नर्मदा में नहीं जाने का प्रस्ताव किया जायेगा। पंचायतों का सुदृढ़ीकरण किया जायेगा जिससे वो जलग्रहण क्षेत्र का प्रबंधन और सीवरेज का उपचार स्वयं कर सकें।
नर्मदा तटों के संरक्षण और उन्हें कटाव से बचाने के लिये वृक्षारोपण के अलावा उपयुक्त घास और झाड़ियाँ भी लगायी जायेंगी। नर्मदा बेसिन में सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्र बनाये जायेंगे, जिनमें प्रोत्साहन योग्य, नियंत्रण योग्य और प्रतिबंधित गतिविधियों के लिये स्पष्ट प्रावधान होंगे।
नर्मदा नदी के क्षेत्र का स्पष्ट सीमांकन कर सीमा निर्धारित की जायेगी। कार्यक्रम की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिये बेसलाइन डाटा तैयार किया जायेगा। ईको टूरिज्म और नदी पर्यटन को बढ़ावा दिया जायेगा। वैज्ञानिक तरीके से वैध उत्खनन का नियमन किया जायेगा। उद्योगों और स्थानीय निकाय से दूषित सामग्री का जीरो डिस्चार्ज नदी में हो इसकी नीति बनायी जायेगी।
जैविक खेती के क्षेत्रफल को बढ़ाया जायेगा। जैविक खाद पर भी अनुदान दिया जायेगा। जैविक खाद का मानकीकरण किया जायेगा। नर्मदा घाटों पर शांत क्षेत्र और मेडिटेशन क्षेत्र बनाये जायेंगे। सभी प्रदूषण स्रोतों की जीआईएस मेपिंग की जायेगी। रिवर ज़ोन और फ्लड ज़ोन चिन्हित किये जायेंगे। अमरकंटक क्षेत्र में कोई उत्खनन नहीं होगा। नर्मदा किनारों के मास्टर प्लान में नदी संरक्षण का ध्यान रखा जायेगा। नर्मदा नदी को जीवित इकाई का दर्जा देने वाले अधिनियम के क्रियान्वयन के लिये समिति बनाई जायेगी।