जरुर पढ़ें विवेक सक्सेना का यह आर्टिकल – चौकीदार तो सो रहा है !

विवेक सक्सेना-
मुझे बचपन से ही कहानियां पढ़ने का बुहत शौक था। उन दिनों पराग, नंदन, राजा भैया व चंदामामा सरीखी बहुचर्चित बाल पत्रिकाएं मेरे घर आती थी। चंदामामा में विक्रम और बेताल नामक एक स्थाई स्तंभ होता था। जिसमें बेताल को उठा कर ले जाने वाला विक्रम एक कहानी सुनाता था और अपनी पीठ पर लदे हुए बेताल से उस कहानी की वजह और शिक्षा पूछता था। एक बार मैंने एक कहानी पढ़ी कि एक राजा था जिसने अपने प्रहरी रखे हुए थे जो कि महल की रक्षा करते थे। एक सुबह एक प्रहरी राजा के पास आया और उससे कहने लगा कि राजासाहब आज आप शिकार पर मत जाना। बीती रात मैंने बहुत बुरा सपना देखा था कि जब आप जंगल में शिकार पर गए तो वहां आदिवासियों ने आपके दल पर हमला करके आपको घायल कर दिया।

राजा ने उसकी बात सुनी व उसे वापस भेज दिया। राजा उस दिन शिकार पर गया पर पूरी तैयारी के साथ और अपने साथ ज्यादा अंगरक्षक ले गया। संयोग से जंगल में उस पर आदिवासियों ने हमला किया मगर राजा ने जोकि पहले से तैयार था उन्हें हरा दिया और सकुशल महल वापस आ गया। घर लौटते ही उसने प्रहरी को बुलाकर उसे पुरुस्कृत किया मगर इसके साथ ही उसे नौकरी से निकाल दिया। यह कहानी सुनाने के बाद विक्रम ने बेताल से पूछा कि राजा ने ऐसा क्यों किया तो वह बोला कि राजा ने उसे इसलिए ईनाम दिया क्योंकि उसने उसकी जान बचाई व नौकरी से इसलिए निकाला क्योंकि वह प्रहरी होने के बावजूद रात को पहरा देने के बजाए सोता था। इतना कह कर बेताल पेड़ से लटक गया।

पहले मैं इस कहानी को ज्यादा समझ नहीं पाया था मगर जब चुनाव के दौरान व बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद को देश का चौकीदार कहा तब मुझे इस कहानी की याद आ गई। फिर मोदी व माल्या का मामला आया और अब नवीनतम नीरव मोदी का मामला आया है। मुझे लगा कि हमारे हुक्मरान भी राजा के सही अर्थों में इस चौकीदार की तरह होते हैं जो कि पहरेदारी करने की जगह सोता है और फिल्मी पुलिस की तरह जब सारा मामला समाप्त हो जाता तो सीटी बजाता हुआ आता है।

पहले सांसद होते हुए माल्या 9000 करोड़ का चूना लगाकर मजे से देश छोड़कर चला गया और अब नीरव मोदी का मामला सामने आया है जो अपने परिवार, पत्नी व सहयोगी चाचा समेत जनवरी में ही देश छोड़कर चला गया था जबकि चंद दिन पहले पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत पर सीबीआई व प्रवर्तन निदेशालय ने उसके खिलाफ मामला दर्ज किया है। अब सब हल्ला मचा रहे है उसके यहां छापे मार रहे हैं और बैंको को 11400 करोड़ का चूना लगाने वाला यह उद्योगपति दावोस में जनवरी अंत में प्रधानमंत्री के साथ फोटो खिंचवाता नजर आया। उसे पकड़ने की जगह कांग्रेंस व भाजपा एक दूसरे पर यह आरोप लगाने में व्यस्त है कि वह किसका करीबी था? भाजपा कह रही है कि यह धोखाधड़ी तो 2011 से चल रही थी। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि फिर आप लोगों ने 2014 में सत्ता में आने के बाद चौकीदार रहते हुए क्या किया? याद है न कि जगननाथ मिश्र के मुख्यमंत्री रहते हुए जो चारा घोटाला हुआ था उसमें उन्हें व लालू यादव दोनों को सजा हुई।

बहरहाल हम आम आदमी क्या कर सकते हैं क्योंकि हमारी नियति तो बेताल की तरह पेड़ पर लटकना है। वैसे बता दूं कि मुझे शुरू से अपराधियों, आतंकवादियों, धोखेबाजों से मिलने व उनके बारे में जानकारी इकट्ठी करने में बहुत रूचि है। मैं भिंडरावाला, लालडेंगा से लेकर बड़े से बड़े खालिस्तानी आतंकवादियों से मिला। चार्ल्स शोभराज सरीखे आतंकवादियों से बातचीत की और जब वीपी सिंह ने राजीव गांधी के खिलाफ चुनाव अभियान शुरू किया तो व्यासजी ने मुझे स्थाई रूप से उसके साथ लगा दिया था मगर जब पालम पर हाजी मस्तान नामक कुख्यात तस्कर से मुलाकात हुई जिसके सामने दाऊद बच्चा था तो मैंने उससे मुलाकात कर सबसे पहले उसका इंटरव्यू भेजा।

नीरव मोदी की कहानी भी बहुत रोचक है। उसके बाबा केशव लाल मोदी 1920 में सिंगापुर चले गए जहां पर उन्होंने जेवरों का काम किया जबकि उसके पिता दीपक मोदी ने बेल्जियम में यही धंधा किया। वे लोग गुजरात के पालनपुर के रहने वाले थे जहां से ज्यादातर जौहरी व सुनार आते थे। इस 46 वर्षीय नीरव मोदी ने 19 साल में बेल्जियम छोड़ दिया व पेन्सिल्वेनिया की व्हार्टन इंस्टीट्यूट में पढ़ने गया मगर पढ़ाई पूरी नहीं कर सका। उसे भी जेवरों का शौक था। उसने अपने मामा मेहुल चौकसी के गीताजंली ज्वैलर्स के साथ जेवरों का काम किया।

उसने 1999 में फायरस्टोन नामक कंपनी खोली जिसका नाम बाद में फायरस्टार कर दिया गया। वह कला व डिजाइन में माहिर था। उसके एक दोस्त ने 2008 में उसे अपनी पत्नी के लिए कुंडल बनाने को कहा व उनकी डिजाइन से इतना प्रभावित हुआ कि उसने उसे जेवरों का धंधा करने की सलाह दी। उसके बनाए जेवर बेहद महंगे व सुंदर हुआ करते थे। उसकी हैसियत का अनुमान तो इस बात से ही लगाया जा सकता है कि दुनिया की सबसे बड़ी नीलाम कंपनी सोथवे के कैटेलॉग के मुख्यपृष्ठ पर छपने वाला वह देश का पहला सुनार था। उसके जवारात व जेवर टाइटेनिक की हीरोइन ‘केंट विंसले समेत लीजा हेडन, कोको रोमा सरीखी दुनिया की प्रसिद्ध हीरोइनें पहनती थी।

प्रियंका चौपड़ा उसके जेवरों की ब्रांड एंबेसंडर थीं और अब उसकी धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद उससे संबंध तोड़ने की बात कर रही है। उनके सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ उसके जेवरों के पोस्टर हर जगह दिख जाएंगे। करीना कपूर, सोनम, करिश्मा, शिल्पा शेट्टी उसके जेवरा की दीवानी थी। उसने मुंबई के कुरला, लोअर पटेल, दिल्ली के डिफ्रेंस कालोनी, अमेरिका के हांगकांग तक में अपनी शाखाएं खोली। जब मेडिसन स्कवायर में 2015 में उनके शोरूम का उद्घाटन हुआ तो डोनाल्ड ट्रंप उनके मुख्य अतिथि थे। उसने गोलकंडा के सबसे बड़े व महंगे हीरे के आभूषण तैयार किए।

घर में गुजराती बोलने वाले इस व्यापारी के तीन बच्चे व बीबी अभी अमेरिकी नागरिकता प्राप्त हैं। महज चार साल पहले फोर्ब्स के भारतीय अरबपतियों की सूची में शामिल होने वाले इसे उद्योगपति ने दो साल पहले ही पीएनबी को चूना लगाया था। अब वह अपनी पत्नी, अपने परिवार भाई व मामा के साथ जनवरी में देश छोड़ गया है। अब सरकार किसी तरह उसको वापस लाने की बात कह रही है जैसा कि मोदी व माल्या के मामले में हुआ। ईडी ने उनके 17 ठिकानों पर छापे मारकर 5100 करोड रुपए की संपत्ति जब्त कर ली है मगर कोई उससे पूछे कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बाकी जेल में बंद सहारा के मालिक सुब्रुत राय सहारा से 24000 करोड़ वसूलने के लिए उसकी संपत्ति की नीलामी के आदेश का क्या हुआ? आज तो सहारा विज्ञापन में खुद को सबसे बड़ा देशभक्त बताते हुए टीवी पर अपने विज्ञापन में सबको आंखें दिखा रहा है।