भाजपा सरकार ने तोडा बापू का ‘दूसरा राजघाट’, कांग्रेस ने बताया शर्मनाक

भोपाल | मध्यप्रदेश में नर्मदा तट पर स्थित महात्मा गांधी का दूसरा राजघाट गत गुरुवार को मिट्टी में मिल गया | यहां लोग सत्य, अहिंसा और शांति की प्रेरणा लेने आते थे | ऐसे गांधीवादियों को कुछ दिन बाद वहां सिर्फ पानी ही पानी नजर आएगा | दरअसल सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाने से मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में नर्मदा नदी के तट पर स्थित ‘राजघाट’ भी डूब में आने वाला था | प्रशासन ने इस स्थल को दूसरी जगह शिफ्ट कराने की योजना बनाई |

बड़वानी के जिलाधिकारी तेजस्वी नायक ने बताया कि जिस चबूतरे पर महात्मा गांधी की देह-राख रखी हुई थी, वह पूरी तरह कंक्रीट का बना हुआ था | उस समूचे चबूतरे को जेसीबी मशीन की मदद से जस का तस निकाल लिया गया है, किसी तरह की क्षति नहीं हुई है | अब दूसरी जगह अस्थायी स्मारक बनाया जाएगा | गांधीवादी और अहिंसा के प्रेमियों के लिए बड़वानी का ‘राजघाट’ दिल्ली के ‘राजघाट’ से कम महत्व का नहीं था, क्योंकि यहां बनाई गई समाधि में केवल महात्मा गांधी की ही नहीं, कस्तूरबा गांधी और उनके सचिव रहे महादेव देसाई की देह-राख (एश) रखी हुई थी | गुरुवार की सुबह इस स्थान पर जेसीबी मशीन चलते देखकर कुछ लोग भड़क उठे, मगर पुलिस ने उन्हें काबू में कर लिया |

तीनों महान विभूतियों की देह-राख यहां गांधीवादी काशीनाथ त्रिवेदी जनवरी, 1965 में लाए थे और समाधि 12 फरवरी, 1965 को बनकर तैयार हुई थी. इस स्थल को ‘राजघाट’ नाम दिया गया था. त्रिवेदी ने इस स्थान को गांधीवादियों का तीर्थस्थल बनाने का सपना संजोया था, ताकि यहां आने वाले लोग नर्मदा के तट पर गांधी की समाधि के करीब बैठकर अहिंसा और शांति का पाठ पढ़ सकें |

राजघाट तोड़ने को कांग्रेस ने बताया शर्मनाक –

नर्मदा नदी के तट पर बड़वानी में स्थित राजघाट पर बुलडोजर चलाए जाने को कांग्रेस ने राष्ट्रीय शर्म का विषय बताया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर बड़वानी के राजघाट स्थित स्मारक एवं अस्थियों पर भाजपा सरकार द्वारा बुलडोजर चलाने की निंदा करते हुए कहा कि गोडसे की सरकारों से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है।

अजय ने कहा, “200 साल से गुलामी की जंजीर में जकड़े भारत को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने लंबे संघर्ष के बाद आजाद करवाया। उन्हीं गांधी की स्मृतियों को जमींदोज करने के लिए भाजपा सरकार ने बुलडोजर चला दिया।” उन्होंने कहा, “सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाने से मध्यप्रदेश में भारी नुकसान होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर गुजरात को लाभ पहुंचाने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले विधानसभा में विस्थापितों एवं राजघाट से गांधी जी की अस्थियों के हटाए जाने के विषय पर चर्चा से डरकर भागे और बाद में उनकी सरकार महात्मा गांधी के स्मारक सहित प्रदेश के तीन लाख से अधिक विस्थापितों का अस्तित्व खत्म करने में जुट गई है।”

अजय ने कहा, “देश में बड़वानी का राजघाट एकमात्र ऐसा स्थान था, जहां महात्मा गांधी कस्तूरबा गांधी एवं गांधी जी के सचिव की अस्थियां एक साथ रखी गई थीं। मध्यप्रदेश के इस गौरव को गोडसे की सरकार ने अंधेरे में बुलडोजर चलाकर राष्ट्रीय शर्म के दिन के रूप में बदल दिया।”