अगर आप मां बनना चाहती हैं तो इन आदतों से रहिये दूर !

आज की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में महिलाएं भी ड्रिंकिंग और स्मोकिंग करतीं हैं लेकिन डॉक्टरों की मानें तो इन चीजों का सेवन मां बनने की राह में अड़चन डाल सकता है। फास्ट फूड तथा जंक फूड खाने और कोल्ड ड्रिंक पीने के अनेक नुकसान हैं। हमारी फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर हमारे खानपान का गहरा असर पड़ता है। बदलती लाइफस्टाइल के बीच खान-पान की आदतों में आए बदलावों की वजह से महिलाओं को भी कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। डॉक्टरों का तो मानना है कि स्मोकिंग के साथ ऐल्कॉहॉल और जरूरत से ज्यादा मात्रा में सोडा और गैस युक्त कोल्ड ड्रिंक्स के सेवन की वजह से महिलाओं की गर्भधारण क्षमता पर असर पड़ रहा है। प्रेग्नेंसी के दौरान तो डॉक्टर इन चीजों के सेवन से बचने की सलाह देते ही हैं मगर प्रेग्नेंसी के पहले भी इन चीजों का सेवन प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकता है।
ऐल्कॉहॉल का बुरा असर
दिल्ली के कस्तूरबा हॉस्पिटल की कंसल्टेंट गाइनकॉलजिस्ट डॉ. मारुति सिंह के मुताबिक ‘आमतौर पर महिलाएं मानती हैं कि वोदका या रेड वाइन जैसे ऐल्कॉहॉलिक ड्रिंक्स के सेवन से हेल्थ पर ज्यादा नेगेटिव असर नहीं पड़ता लेकिन सच्चाई यह है कि किसी भी तरह के ऐल्कॉहॉल युक्त ड्रिंक के सेवन से गर्भधारण करने की क्षमता कई तरह से प्रभावित होती है। इसके अलावा कई बार प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं का शुगर लेवल बहुत बढ़ जाता है इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान कोल्ड ड्रिंक का सेवन करने से भी मना किया जाता है क्योंकि उसकी वजह से कई तरह की दिक्कतें पैदा होने का खतरा बना रहता है। साथ ही इन ड्रिंक्स में अत्यधिक सोडा होने की वजह से पेट में गैस भी बनती है, जिससे गर्भाशय पर भी दबाव बढ़ता है।’
आर्टिफिशल स्वीटनर से खतरा
मशहूर गाइनकॉलजिस्ट डॉ नुपूर गुप्ता बताती हैं, ‘कोल्ड ड्रिंक्स और सोडा युक्त पेय पदार्थों में एस्परटाइम नामक एक आर्टिफिशल स्वीटनर का इस्तेमाल होता है, जिसमें एंडोक्राइन ग्लैंड्स को डिस्टर्ब करने वाले गुण होते हैं। यह महिलाओं के हॉर्मोन्स में असंतुलन पैदा करता है। इसके चलते अत्यधिक मात्रा में कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन करने वाली महिलाओं को आगे चलकर गर्भधारण करने में दिक्कतें आ सकती हैं।’ एस्परटाइम में फेनिलएलनिन और एस्पर्टिक ऐसिड नामक दो अमीनो ऐसिड मौजूद होते हैं। अन्य अमीनो ऐसिड्स के साथ इनके सेवन को नेचुरल और हानिरहित माना जाता है लेकिन जब इन्हें एक साथ न लेकर अलग-अलग इनका सेवन किया जाता है, तो ये फ्री रैडिकल्स के निर्माण को बढ़ावा देते हैं, जिससे कोशिकाएं मरने लगती हैं। अगर अत्यधिक मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो अंडाणु बनाने वाली कोशिकाओं के मरने की संभावना 90 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
कैफीन भी होता है नुकसानदेह
आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. निताशा गुप्ता बताती हैं ‘एस्परटाइम के अलावा ज्यादातर सॉफ्ट ड्रिंक्स में कैफीन और फ्रूक्टोज भी पाए जाते हैं, जिनके चलते महिलाओं में ओव्यूलेटरी डिसऑर्डर और गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। कैफीन के असर से गर्भाशय तक ब्लड को सर्कुलेट करने वाली नसें सिकुड़ने लगती हैं, जिससे गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय में ब्लड का फ्लो कम होने का खतरा पैदा हो जाता है। नतीजन, गर्भ में पल रहे भ्रूण का सही तरीके से विकास नहीं हो पाता और कई बार उसकी वजह से गर्भपात भी हो जाता है। कैफीन, एस्परटाइम और फ्रूक्टोज का कॉम्बिनेशन सेक्स हार्मोन्स और हार्मोन रिसेप्टर्स को प्रभावित करता है, जिससे अंतत: इनफर्टिलिटी का खतरा बढ़ जाता है।’
डॉक्टरों के मुताबिक शुगर और गैस युक्त पेय पदार्थ वजन बढ़ाने, शुगर लेवल बढ़ाने और हार्मोन्स में असंतुलन पैदा करने के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी कम करते हैं, जिसके फलस्वरूप अनहेल्थी प्रेग्नेंसी, भ्रूण के सही तरीके से विकसित न हो पाने और गर्भपात जैसी समस्याओं के पैदा होने का खतरा बना रहता है।
-एजेंसी