योगी आदित्यनाथ कभी भी दे सकते हैं इस्तीफ़ा, 28 साल बाद टूटेगा नाता

लखनऊ | मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 5 अगस्त को वे उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान करेंगे। इसके बाद उनके इस्तीफे का एलान कभी भी हो सकता है। सोमवार 17 जुलाई को उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान किया। हालांकि उन्हें 19 सितम्बर के पहले विधानसभा या विधान परिषद पहुंचना होगा।उन्होंने 19 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। सीएम बने रहने के लिए छह महीने के भीतर उनका एमएलए या एमएलसी बनना जरूरी है। इस मियाद में बमुश्किल दो महीने बाकी हैं। चूंकि अब वह सीएम हैं इसलिए उन्हें सांसद पद छोड़ना पड़ेगा। पार्टी ने उन्हें राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव तक के लिए संसद सदस्य बनाए रखने का फैसला किया था। पूरे 28 साल बाद गोरखपुर संसदीय सीट का गोरक्षपीठ से रिश्ता टूटेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार 5वीं बार इस सीट से लोकसभा पहुंचे। उनके पहले उनके गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ लगातार तीन बार 1989, 1991 और 1996 में सांसद रहे।

बढ़ती उम्र के कारण उन्होंने योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर संसदीय सीट का संसद में प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया। तब से योगी आदित्यनाथ लगातार पांच बार लोकसभा पहुंच चुके है। योगी का इस्तीफा देना सर्वविदित है लेकिन वह विधानमंडल दल का सदस्य कैसे बनेंगे, यह रहस्य बना हुआ है। चुनाव लड़कर एमएलए बनेंगे या सीधे एमएलसी। योगी को विधायक बनवाने के लिए गोरखपुर समेत कई जिले के आधा दर्जन से अधिक विधायक महीनों पहले योगी के लिए अपनी सीट छोड़ने की पेशकश कर चुके हैं। गोरखपुर मंडल में गोरखपुर ग्रामीण, सहजनवा, पिपराइच और डुमरियागंज समेत कई विधायकों का ऐलान है कि योगी उनकी सीट से चुनाव लड़ें।