लखनऊ : खड़ी कार के खुले दरवाजे बुला रहे थे उसे मौत की ओर ! आखिर, किसे बचा रही है पुलिस ?

लखनऊ | सूबे की राजधानी में पुलिस द्वारा एक बच्ची की हत्या के मामले की थ्योरी को दबाने का मामला प्रकाश में आया है | हसनगंज थाना क्षेत्र के इस मामले में पुलिस की थ्योरी से कई सवाल खड़े हो रहे हैं | सामजिक कार्यकर्ता रीता शर्मा ने अब पूरा मामले सीएम योगी के समक्ष उठाने का निर्णय किया है | सामाजिक कार्यकर्ता रीता से भी पुलिस ने अभद्र व्यव्हार किया और उन्हें जानकारी तक उपलब्ध कराने में आनाकानी की | पढ़िए सामिजक कार्यकर्ता रीता  शर्मा के नजरिये से यह पूरा मामला-

रविवार 11 तारीख को दोपहर निराला नगर लखनऊ में 10 बजे निकली 8 वर्षीय बच्ची की माँ को जब याद आया कि वो नहीं है तो  12-12.30 के आसपास वो खोज बीन और पूछ ताछ को निकली, खेलने की हद तक जुनूनी बच्ची कई बार माँ की नज़रे बचाकर निकल जाया करती थी। उस दिन भी उन्होंने कुछ ऐसा ही सोच किसी दरिंदगी और मौत की कल्पना भी न की थी, खोजते खोजते रात के 1 बज चुके थे तो उन्होंने सोचा थाने फ़ोन कर पूछे..इसके लिए बच्ची की माँ ने 100 no पर कॉल की काफी देर तक सभी रूट व्यस्त बताता रहा फिर नंबर लगने इन्होंने उनसे थाना हसनगंज का नंबर माँगा तो 100 नंबर वालों ने उन्हें नंबर massage करने की बात कहकर फ़ोन रख दिया लेकिन कोई नंबर का मैसेज नहीं आया…काश कि उन्हें नंबर मिल जाता तो शायद पुलिस की खोजबीन में बच्ची मिल सकती थी। उनके घर से कुछ दूर पर पुलिस चौकी भी है जिसका उन्हें पता नहीं था संभव था कि वहां कोई न कोई मौजूद होता तो शायद मदद मिल जाती या यूँ कहे कि उन्हें इस प्रकार की किसी घटना का अहसास न था वरना वो थाने भी पहुँच जाती, बच्ची के पिता बंगलौर में नौकरी करते है, बाकी भाई बहन भी छोटे ही है इसलिए एक माँ अपनी बच्ची की तलाश में दर दर भटकती रही और रात में 1 बजे के बाद थक हार कर घर आ गयी और सोचा कि कल सुबह थाने जाकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराएंगी।
पूरी मीडिया जोर शोर से इस शर्मनाक घटना को कवर कर रही है लेकिन पुलिस के नज़रिये से, मृत बच्ची के माँ और पिता के पास कोई आता भी है तो अपनी पहचान नहीं बताता। एक बड़े अख़बार ने जिस तरह की खबर कवर की थी उससे मेरा माथा ठनका तो मैं खोजते खोजते उनके घर पहुँची.. उनसे उस खबर के बारें में पूछा जो माँ के आधार पर दी गयी थी बच्ची की माँ ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है वो समझ नहीं पायी और मतलब समझाने पर उन्होंने साफ़ इंकार किया कि हमने ऐसा नहीं कहा था उनका कहना था कि–” उन्होंने हमें कैमरा (cctv footage) दिखाने को बुलाया था, दिखा दिखा कर पूछा कि ऐसा है ना?

1..देखे बच्ची अकेले जा रही है कोई साथ नहीं है..माँ ने हाँ कह दी
2.. देखे बच्ची ने कार का पिछला दरवाजा खोला और कोई नहीं दिख रहा..तो फिर उन्होंने हाँ कर दी
3.. देखे बच्ची रात 12.30 तक अकेले ही कार में दिख रही है और कोई नहीं आया..उन्होंने फिर हाँ कही।
4..इतनी तेज गर्मी में बच्ची दम घुटने से और गर्मी से भी मर सकती है ना.. तो उन्होंने फिर हाँ कह दी।

और इस तरह बच्ची की माँ को conveynce कर बयान दर्ज कर लिया और एक प्रतिष्ठित अख़बार में CCTV फुटेज के साथ खबर दे दी..” मंदबुद्धि बच्ची खेलते खेलते ख़राब खड़ी खुले दरवाजे वाली गाड़ी में गयी और अंदर फंस गयी और तड़प तड़प कर मर गयी ”
और साथ ही मृत बच्ची के माँ के आधार पर PM(पोस्टमार्टम ) रिपोर्ट पर भी सवाल उठा दिए..”रिपोर्ट में लिखा है सर पर चोट ये कैसे संभव है।” जबकि बच्ची की माँ को इन सब बातों का मतलब भी नहीं पता, एक सवाल के जवाब के लिए उन्हें कई कई बार पूछना पड़ता है तो सवाल उठता है कि इसको पुलिस प्राकृतिक दुर्घटना करार कर फ़ाइल बंद तो नहीं करना चाहती? क्या वो किसी को बचाने की कोशिश कर रही है? क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची पर यौन हमला और सर पर चोट की पुष्टि को भी मानने से इंकार कर रही है। माँ के शक के आधार पर निराला नगर स्थित बेस्ट डील 4 व्हीलर्स कार बाजार जहाँ बन्द पड़ी कार में बच्ची की लाश मिली वही के स्वीपर को शक के आधार पर हिरासत में ले लिया है।
तफशिश कर रहे इस्पेक्टर पी के झा से जब फ़ोन कर ये पूछा कि.”अभी तक इनको गुमशुदगी की FIR कॉपी क्यों नहीं दी गयी? उनका जवाब था..”आप कौन होती है पूछने वाली, ये बताने पर भी कि मैं एक सोशल वर्कर हूँ, उनका बातचीत का अंदाज़ बहुत गलत था।” फ़ोन पर बात इसलिए क्योंकि वो हसनगंज थाने में मौजूद नहीं थे, इस पर CO महानगर को कॉल करके मिलने का टाइम पूछा तो उनका जवाब था..”इसमें हम क्या करें जाँच चल रही है और हम PM के सुरक्षा कार्यक्रम में व्यस्त है नहीं मिल सकते।” FIR हुई थी 12 जून को और बहुत दबाव में आकर 18 जून को इसकी एक कॉपी दी गयी, जबकि दूसरी कॉपी पर रिसीविंग नहीं ली गयी और वजह पूछने पर कहा कि हमें 24 घंटे के भीतर कोर्ट भेजना होता है इसलिए भेज दी, लेकिन जब पीड़ित परिवार रोज थाने जा रहा है तो उनसे हस्ताक्षर क्यों नहीं लिए गए? अगर पीड़ित परिवार को नहीं पता था तो उन्होंने खुद से FIR की कॉपी क्यों नहीं दी गयी? अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कोई कॉपी नहीं दी गयी, बस CCTV फुटेज दिखाकर अपने हिसाब से हामी भर वा कर बयान दर्ज कर लिए और उसे एक बड़े न्यूज़ पेपर में छप वा दिया। बच्ची जब मृत मिली तो वो किस हाल में थी इसका कोई फ़ोटो मीडिया में नहीं दिखाई गयी क्यों? केवल CCTV फुटेज ही क्यों दिखाया जा रहा है जिसमे बच्ची ठीक दिख रही है। उस मासूम जिस अवस्था में  मिली थी उसकी उस समय की वास्तविक फ़ोटो आनी चाहिए थी तो शायद पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट से इनकार न कर पाती। बच्ची की माँ से बातचीत पर इसमें किसी गिरोह के शामिल होने की आशंका से ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि अब दूसरा कौन? क्योंकि अभी तकरीबन 1 साल पहले अलीगंज पार्क में दुष्कर्म के बाद बच्ची की लाश, इस बच्ची के बाद बक्शी के तालाब पर दुष्कर्म के बच्ची की लाश साफ़ साफ़ किसी गिरोह की ओर इशारा करता है जो सिर्फ मासूम बच्चियो का ही शिकार करता है।
बच्ची की माँ से बात करने पर कुछ चौकाने वाले तथ्य सामने आये, पेश है कुछ अंश…

सवाल- क्या इससे पहले भी बच्ची गायब हुई थी? आपने उस कार स्वीपर का नाम कैसे और क्यों लिया ? क्या वो कभी साथ दिखा था बच्ची के?
जवाब..माँ का– हाँ तकरीबन 15 दिन पहले की बात है मैं निराला नगर स्थित बेस्ट डील 4 व्हील कार बाजार से होकर जा रही थी अचानक प्यास लगी तो रोड किनारे खड़ी कार से साथ लिए झोले को सहारे से रखकर पानी पीने लगी..अचानक कार के अंदर नज़र गयी तो मैं डर गयी उसमे एक बच्ची का हाथ दिख रहा था उसने कंगन पहने थे ये वही थे जिसे बेटियां ने अभी कुछ दिन पहले जिद से ख़रीदे थे उसके चमकते नग ने मेरा ध्यान खीचा तो हड़बड़ा कर मैंने कार का दरवाजा खीचा वो लॉक नहीं था तो खुल गया और अपनी बच्ची को अंदर देख दंग रह गयी…वो कुछ कुछ बेहोशी की हालात में थी, थोड़ी देर हिलाने पर वो जाग गयी और जब मैंने उसे बाहर निकाला तो वही उसी कार के एकदम नज़दीक वो कार स्वीपर को खड़ा देखा। मैं उसे चुपचाप घर ले आई हाथ मुंह धुला कर उसे लिटाया तो कुछ देर में वो सामान्य हुई और पूछने पर कि तुम्हे वहां कौन ले गया था जवाव दिया बच्ची ने अंकल ,पर नाम नहीं बता पायी। और ये ध्यान आते ही कि क्या उसे कार खोलना आता है या नहीं इसके लिए उसे एक कार खोलने को कहा पर कार नहीं खोल पायी। और बच्ची कई बार टाफी खाती थी और पूछने पर कहती थी कि अंकल ने दिया। उनके घर के आसपास सभी लाड़ दुलार करते थे तो उसे सामान्य ले लिया। पर वो कार स्वीपर उनको खटकता रहा वो कई बार बच्ची को लेकर वहां गयी लेकिन वो लड़का उन्हें वहां नहीं दिखा तो बात फिर भूल गयी और अब बच्ची ने बाहर जाना भी बंद कर दिया था।

सवाल-इसके अलावा भी बच्ची कभी कही गयी क्या? क्या नज़रें बचाकर निकलना उसकी आदत में था? क्या वो सामान्य थी?
जवाब –माँ का– हाँ 2-3 बार बच्ची पहले भी गायब हुई थी, एक बार तो हम अनाथालय से लाये थे तब वो शनि मंदिर डालीगंज मंदिर के पास खेलती मिली थी तो पुलिस उसे अनाथालय छोड़ आई थी और थाने जाने पर उन्होंने अनाथालय (राजकीय बाल गृह मोहन रोड लखनऊ) से बात करायी तो वो वहां से बच्ची ले आई थी और अनाथालय से वो उनका नंबर भी ले आई थी और फिर एक बार बेटी नहीं दिखी तो उन्होंने वही फ़ोन किया तो बेटी वही मिली। बेटी को खेलने का बहुत शौक था खास कर कुत्ते और बिल्ली से लेकिन वो हमेशा अकेले ही खेलती थी, कई बार उसे आस पड़ोस वाले डॉट कर घर भी छोड़ जाते थे।
हाँ वो बिलकुल सामान्य थी लेकिन कभी कभी जाने कौन सी सनक सवार (किसी नशे की तो आदी नहीं जो उक्त व्यक्ति टॉफी में खिला रहा हो) होती थी तो निकल जाती, ऐसा कई बार हुआ पर मिल जाती थी लेकीन इस बार तो…..शायद कार का खुला दरवाजा और कार बाजार उसकी मौत बन कर आया था।।

सवाल–क्या जब जब बच्ची गायब हुई तो किसी ने भी उसे किसी के साथ देखा क्या? क्योंकि इतनी छोटी बच्ची का शनि मंदिर तक अकेले पहुचना,कार बाजार निराला नगर तक जाना तो काफी दूर है, संभव नहीं और दूसरी बात कि उसे क्या पता कि कार का दरवाजा खुला है? और खोलना कैसे आया उसको, क्योंकि हम सब खुद किसी नयी कार में बैठते है तो तुरंत दरवाजा खोल नहीं पाते तो बच्ची कैसे ?
जवाब माँ का– नहीं कभी किसी के साथ नहीं देखा किसी ने भी, बस उसी दिन कार के अंदर से निकालते समय उस स्वीपर पर नज़र पड़ी जो कार के बेहद करीब था। बच्ची कई बार अंकल अंकल करती थी पर नाम नहीं बता पायी कभी। हो सकता कोई हो जिससे बच्ची घुली मिली हो जो उसके बाहर निकलने पर उससे थोडा दूरी बना कर चलता हो और किसी की नज़र पड़ने पर झट अलग हो जाता हो और कार बाजार का रास्ता और कार खोलना उसी ने सिखाया हो क्योंकि बच्ची तेज और चंचल तो थी ही।
क्या पता उस दिन उसके दिन गलत करने पर बच्ची ने कहाँ हो कि माँ को बता दूंगी जिससे उसकी हत्या कर दी हो, क्योंकि इससे पहले कार में मिलने पर बहुत डाटा था और कहीं न जाने को कहा था और उसने जाना भी बन्द कर दिया था न जाने उस दिन कैसे? पता नहीं कोई दरिंदा कब से पीछे लगा था और बच्ची को बुलाता रहा और उसे उसकी आदत और कम अक्ल समझती रही।

सवाल-आपको कैसे पता चला कि आपकी बच्ची कार बाजार निराला नगर में कार के अंदर मृत पायी गयी है? क्या पुलिस ने आपको सूचित किया?
जवाब माँ का– मैं सुबह रिपोर्ट लिखा कर वापस आ रही थी तो उसी बेस्ट डील कार बाजार के पास पुलिस और भीड़ देखी जहाँ 15 दिन पहले कार के अंदर कुछ बेहोशी की हालात में बच्ची मिली थी,तो मैं रुक गयी और एक पुलिस वाले से पूछा कि सर क्या आप बता सकते है कि यहाँ भीड़ क्यों है और उनके ये कहने पर कि यहाँ एक बच्ची मृत मिली है कार में , तो मेरा दिल धक से हो गया और मुझे लगा कि ये मेरी बच्ची है, मैंने उनसे कहा कि मुझे उस बच्ची को देखने दे उन्होंने पूछा क्यों? ये बताने पर कि मेरी बच्ची कल से गायब है और अभी थाने से रिपोर्ट लिखा कर आ रही हूँ उन्होंने मुझे वहां भेजा… ये क्या ये तो मेरी ही बच्ची थी देखते ही तबियत ख़राब होने लगी तो उन्होंने मुझे जीप में बैठने को कहा और ये भी कहाँ कि अपनी बच्ची कार से बाहर निकालो तो मैंने मना कर दिया क्योंकि मेरी हालात उसको देखने की नहीं थी
सवाल….अच्छा आपकी बच्ची उस समय किस हालात में थी? मतलब कही पर कोई खून? और क्या पहन रखा था? क्या पैरों पर कही खून दिखा? क्या उसके कपड़े सही हालात में थे?
जवाब माँ का..जब मैंने देखा तो वो उसी हालात में थी जैसे उसने कपडे पहने थे..फ्राक और लेग्गिग और सर पर चोटी.कपडे ठीक थे लेकिन सर पर पीछे जमा हुआ खून था और वाइट लेगिंग पर मुझे तो कोई खून नहीं दिखा तो मैंने उसे दूर से देखा था..हाथ लगाने तक की हिम्मत न हुई। उसके हाथ पर फफोले थे जो फूट गए थे जैसे जलने पर होते है ऐसा लगा कि किसी ने उसे जलाया हो। उसकी फ़ोटो उस समय खिंची गयी थी लेकिन कही भी छपी नहीं ताकि लोग जान सके कि बच्ची कितनी बुरी हालात में थी बस अखबार वाले केवल कैमरे की चलती फिरती और खेलती बच्ची दिखा रहे हैं। तब से अगले दिन तक कोई न कोई पूछताछ कर रहा था और बच्चों से भी किनारे ले जा जाकर, मैं अकेली थी बच्ची के पिता बंगलौर में नौकरी करते हैं तो जब जो समझ आया बोल दिया।

इन सभी बातों और सवालों का जवाब 2 दिन 2 -2 घंटा लगातार कई बार पूछने पर वो सोच सोच कर पता पायी। उनका कहना है बच्ची तो गयी अब हमें न्याय दे दो और उन्हें सज़ा भी ताकि वो किसी बच्चे के साथ ऐसा न कर पाये। उनका शक कार बाजार में काम कर रहे लोगों और उसके मालिक पर भी है।

अब सोचने वाली बात ये है जब कार बाजार ने बच्ची के लाश की सूचना पुलिस को दी और उसकी फ़ोटो भी ली गयी तो वो मीडिया में क्यों नहीं आई? उस समय बच्ची बुरी अवस्था में थी? मीडिया में हसनगंज कार बाजार क्यों लिखा जा रहा है, ये निराला नगर स्थित है बस थाना हसनगंज लगता है? रोड पर खड़ी गाड़ी का लॉक खुला कैसे रहता है? ये साफ़ साफ़ किसी के भी साथ हादसे को आमंत्रित कर रहा है? पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट मानने से क्यों इनकार कर रही है जबकि उसमे साफ़ साफ़ सर पर चोट और यौन हमले की बात आई है? हलाकि विधि विज्ञान प्रयोगशाला ने क्राइम scene क्रिएट कर हर पहलू जाचने की कोशिश की है, लेकिन फिर भी जाच निष्पक्ष नहीं दिख रही |

सामजिक कार्यकर्ता रीता शर्मा ने अब पूरा मामले में सीएम योगी से गुहार लगाई है और मृतका की मां को इन्साफ दिलाने की मांग की है | उन्होने कहा है कि पुलिस जरुर किसी को बचाने की कोशिश कर रहे है | सरकार के लाख प्रयास के बावजूद पुलिस का व्यवहार अच्चा नहीं है | वह कहती हैं कि पूरे मामले को मुख्यमंत्री जी तक पहुंचाएंगे | मृतका के परिवार को न्याय दिलाया जायेगा और दोषियों पर कार्यवाही कराकर रहेंगे |