अलीगढ़ के दिग्गज व्यापारी नेता ज्ञानचंद्र वार्ष्णेय का निधन

अलीगढ | जिले में 1974 से व्यापारी राजनीति शुरू करने वाले पुरोधा ज्ञानचंद्र वार्ष्णेय का बृहस्पतिवार शाम को निधन हो गया। उनके निधन से जिले में शोक की लहर दौड़ गई है। व्यापारियों ने सोशल मीडिया पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। बृहस्पतिवार शाम को उनके शव का अंतिम संस्कार चंदनिया स्थित श्मशान स्थल में किया गया।

ज्ञानचंद्र वार्ष्णेय ने व्यापारी राजनीति का सफर 1974 में शुरू किया थी। शुरुआत में उन्होंने सेल टैक्स को लेकर व्यापारियों को जागरूक किया। बाद में सेल टैक्स खत्म कराकर व्यापार कर लगवाने में विशेष भूमिका निभाई। साथ ही व्यापारियों के हित में कई भूख हड़ताल की। 1982 में 15 दिन तक भूख हड़ताल की थी। एडीएम रहे हरदेव सिंह के लाठीचार्ज के विरोध में तीन दिन तक अलीगढ़ का बाजार बंद करवा दिया था।

हरदेव सिंह से सीधे टक्कर लेते हुए धरना प्रदर्शन शुरू किया। अंत में एडीएम हरदेव सिंह ने धरना स्थल पर पहुंचकर माफी मांगी और धरना बंद कराया था। 1982 से उनके साथ जुड़े मास्टर ओम प्रकाश रेडियो ने बताया कि अधिकारी भी इनके नाम पर सीट छोड़ देते थे। बताया गया कि चार दिन पहले बाथरूम में फिसल गए थे। रीढ़ की हड्डी और कोल्हू की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया। सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इनके तीन बेटे लोकेश वार्ष्णेय, राजेश वार्ष्णेय व सर्वेश वार्ष्णेय के अलावा मनोज वार्ष्णेय दत्तक पुत्र हैं। चारों को वह एक समान मानते थे। इसी का नतीजा है कि चारों बेटों ने अंतिम समय पर उनकी दिन रात सेवा की। दो दिन से ज्ञानचंद्र वार्ष्णेय ने खाना पानी बंद कर दिया था। बृहस्पतिवार शाम करीब 6.55 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। अंतिम संस्कार चंदनिया स्थित श्मशान स्थल में किया गया |