लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट ने दिया तगड़ा झटका, अलग अलग मामलों में चलेगा केस

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट से बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव को तगड़ा झटका लगा है। चारा घोटाला से संबंधित अलग-अलग मामले में उनके खिलाफ केस चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की दलील को स्वीकार कर लिया। झारखंड हाई कोर्ट ने साजिश और अन्य धाराएं हटा दी थीं, लिहाजा लालू यादव की दलील थी कि एक ही मामले के लिए अलग-अलग केस नहीं चल सकते। वहीं सीबीआई ने झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी और कहा था कि साजिश का केस चलना चाहिए साथ ही अलग-अलग केस चलना चाहिए क्योंकि हर केस में उनका रोल अलग-अलग है।
अब सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की दलील को स्वीकार कर लिया है और इस तरह अब लालू यादव के खिलाफ अलग-अलग केस चलता रहेगा और आपराधिक साजिश का चार्ज फेस करना होगा।
दरअसल, सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाले में अतिरिक्त धारा में चार्ज लगाने की गुहार लगाई थी। हाई कोर्ट ने साजिश आदि का चार्ज हटा दिया था। हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लालू यादव पर 6 अलग अलग मामले पेंडिंग हैं। इनमें से एक में उन्हें 5 साल की सजा हो चुकी है और मामला हाई कोर्ट में पेंडिंग है।
मामले की सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव की तरफ राम जेठमलानी ने कहा था कि सभी मामलों में आरोप एक जैसे हैं, इसलिए मामले को लेकर दर्ज किए गए अलग-अलग केसों को सुनने की जरूरत नहीं है। वहीं सीबीआई की तरफ से रंजीत कुमार ने कहा था कि लालू प्रसाद के खिलाफ 6 अलग-अलग मामले दर्ज हैं। जिनमें से 1 मामले में वह दोषी करार दिए गए हैं और मामला हाई कोर्ट में लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट ने 20 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। झारखंड हाई कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ कुछ धारओं में केस रद्द कर दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने साजिश का चार्ज रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि लालू यादव पर सबूत नष्ट करने की धारा-201 और आईपीसी की धारा-511 के तहत केस चलेगा।
सीबीआई ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील की हुई है। लालू यादव की ओर से पेश राम जेठमलानी ने दलील दी थी कि तमाम आरोप एक जैसे हैं ऐसे में अलग-अलग केसों में सुनवाई नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव की दलील खारिज करते हुए सीबीआई की अपील स्वीकार कर ली है।
लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाले के एक मामले में पहले ही दोषी ठहरा दिया है. इसमें उन्हें पांच सालों की सज़ा मिली है. जब सुप्रीम कोर्ट ने यह फ़ैसला दिया था तब उन्हें सांसद के पद से हटना पड़ा था.
इस फ़ैसले के कारण वह चुनाव भी नहीं लड़ पाए थे, हालाँकि अपनी पार्टी का नेतृत्व करते हुए वो राजनीति में सक्रिय हैं.
2013 में लालू को चाइबासा कोषागार से 900 करोड़ के के सावर्जनिक फंड में धोखाधड़ी को लेकर दोषी ठहराया गया था. दोषी ठहराए जाने के बाद लालू कुछ दिन जेल में भी रहे लेकिन बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गई थी.