क्या महिलाओं के उत्पीडन को जिम्मेदार दहेज़ प्रथा के खिलाफ कोई उठाएगा आवाज़ ? जरुर पड़े यह आर्टिकल

अफाक अहमद मंसूरी

आफाक अहमद मंसूरी, लखनऊ  

एक तरफ जहां भारत में ट्रिपल तलाक़ को लेकर महिलाओं की सुरक्षा पर आवाज़ उठ रही है चंद पीड़ित महिला का सहारा लेकर खूब चर्चा चलाई जा रही है वहीं दूसरी तरफ समाज की प्रमुख बीमारी दहेज़ प्रथा की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित नही होता,दहेज़ प्रथा महिलाओं के लिए अभिशाप है हर रोज खबरों के माध्यम से ज्यादा संख्या में दहेज़ के कारण महिलाओं पर हो रहे उत्पीड़न व जिन्दा जलाने की खबरें मिलती रहती हैं |  दहेज़ के कारण महिलाएं पीड़ित हैं, दहेज़ के कारण महिलाओं को ससुराल वाले घर से बाहर निकाल देते हैं, दहेज़ जैसी प्रथा के कारण लड़की के मां बाप दुखी रहते हैं, दहेज़ प्रथा के कारण लड़की को पेट में ही उसकी हत्या कर दी जाती है | दहेज़ की रीति रिवाज के कारण लड़की के पैदा होने से मां बाप के चेहरे पर उदासी छा जाती है और दहेज़ प्रथा के बहुत से मामले तो ऐसे हैं जो समाज के सामने ही नही आते हैं महिलायें घुट घुट कर अपना जीवन जीने पर मजबूर,बेबस और लाचार रहती हैं, लेकिन महिलाओं की ऐसी हालत को देखने, समझने और आवाज उठाने वाला कोई नही है |
क्या सिर्फ तीन तलाक समाज और मीडिया के लिए बीमारी है बल्कि सर्वे के अनुसार सबसे ज्यादा अत्याचार महिलाओं पर दहेज़ के मामले पर होता है ?  दहेज़ के कारण महिलाओं पर अत्याचार पहले अनपढ़ और जाहिल किया करते थे लेकिन वर्तमान स्थिति में पढ़े लिखे और समझदार लोग भी इसका शिकार हैं, दहेज़ की खातिर लड़की को जिन्दा जलाने की खबरें हर रोज मिलती है कुछ वर्ष पहले हिन्दुस्तान के किसी प्रदेश की खबर के अनुसार एक डाक्टर ने अपनी डाक्टर पत्नी को थोड़ा दहेज़ देने कारण उसका क़त्ल कर दिया, सुनकर ताज्जुब होता है कि हमारा देश किस राह पर निकल पड़ा है | दहेज़ प्रथा के खिलाफ क़ानून भी बनाये गए हैं लेकिन बहुत कमजोर कि हर रोज महिलाओं पर हो रहें अत्याचार से देखने को मिलता है | समाज में जितनी भी शादी होती है लड़की वाले अपनी हैसियत के अनुसार दहेज़ जरूर देते हैं, अमीर लोग अपनी अमीरी के हिसाब से दहेज़ देते हैं लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि शादी में सभी महान हस्ती शामिल होते हैं जिनमे नेता, मंत्री बड़े प्रशासनिक अधिकारी व समाज में ऊंचे पदों पर बैठे कई वर्ग के लोग आमंत्रित होते हैं लेकिन इस समाजिक बुराई की तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता और शादी में दिए जाने वाले दहेज़ जैसे अपराध व क़ानून का उलंघन होते हुए अपनी आंखों से देखकर भी शादी का लुत्फ लेते है |
दहेज़ में दी गई मरसडीज कार, एलसीडी और फ्रिज की प्रशंसा करते हैं दहेज़ प्रथा क़ानून के तहत इस पर कोई सख्त कार्रवाई या कोई निर्देश नही दिए जाते हैं और इस पर कोई चर्चा भी नही होती है | शादी में दहेज़ की मांग करना और दहेज़ देना या दहेज़ देने पर प्रशंसा करना ये कानूनन अपराध है | दहेज़ प्रथा से ज्यादा संख्या में महिलाओं की ज़िन्दगी बर्बाद होती जा रही है |  असल में महिलाओं की हिफाजत और सुरक्षा दहेज़ प्रथा की रीति को ख़त्म करने से होगी | अगर भारत सरकार द्वारा लोकतंत्र में वास्तव में महिलाओं की सुरक्षा और दहेज़ प्रथा जैसे अपराध को चर्चा में लाकर उसको ख़त्म करने का सख्त क़ानून बनाया जाए तो वास्तव में भारत के अंदर बहुत से अपराध को रोका जा सकता है |
अब सवाल ये उठता है कि समाज के वह लोग जो एक तरफ जहां ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जैसा नारा देते हैं, वही दूसरी तरफ महिलाओं पर हो रहे दहेज़ रूपी अपराध पर मूकदर्शक बने रहते हैं | क्या वो इस सामाजिक कुरीति के खिलाफ आवाज़ उठाएंगे ? 
-लेखक लखनऊ में स्वतंत्र पत्रकार हैं |