केकडा पालन के क्षेत्र में आया क्रांतिकारी बदलाव केकड़े से किसान हो रहे मालामाल

नयी दिल्ली 18 मई | केकडा पालन के क्षेत्र में आये क्रांतिकारी बदलाव और बाजार में इसकी व्यापक मांग के कारण देश के तटीय राज्यों के किसान एक किलो से भी अधिक वजन का केकडा तैयार कर उसे 1400 रुपये या उससे भी अधिक मूल्य पर बेचकर मालामाल हो रहे हैं।कीचड़ केकड़ा  प्रजाति की विदेशी बाजार में बढ़ रही मांग और इससे मिलने वाली विदेशी मुद्रा को ध्यान में रखते हुए मत्स्य पालन से संबंधित वैज्ञानिकों ने हाल के कुछ वर्षो में इस पर व्यापक अनुसंधान किया है और अपनी प्रौद्योेगिकी एवं पालन की तकनीक को किसानों तक पहुंचाया जिसके कारण तटीय राज्यों में इसका व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन किया जा रहा है। समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीडा) की ओर से मंगलोर में आयोजित अक्वा अक्वारिया इंडिया 2017 में कीचड केकड़ा पालन की तकनीक का प्रदर्शन करने आये राजीव गांधी जल कृषि केन्द्र (आरजीसीए) के सहायक परियोजना प्रबंधक जी के दिनाकरण ने बताया कि हल्के हरे रंग वाले सिल्ला सेरेटा अर्थात कीचड़ केकडा का सही तकनीक से पालन और देखरेख करने वाले किसान आठ माह में एक किलो या इससे भी अधिक वजन का केकडा तैयार कर लेते हैं जो बाजार में आसानी से 1400 रूपये में बिक जाता है ।

डा.दिनाकरण ने बताया कि सिल्ला सेरेटा वैज्ञानिक नाम वाले इस केकडे के पालन के लिए आठ माह का समय उपयुक्त है और इस दौरान हर केकड़े का वजन एक किलो तो नहीं होता है लेकिन औसत का वजन 600 से 800 ग्राम तक हो जाता है । 600 से 800 ग्राम वजन के केकडों का किसानों को 1100 से 1200 रूपये प्रति किलो दाम मिल जाता है । सिंगापुर , आस्ट्रेलिया , मलेशिया और चीन के बाजारों में केकडों की भारी मांग है और भारत इन देशों को इसका निर्यात करता है ।