‘सही मायने में इस्लामी रंग हरा नही भगवा है’ पढ़िए पत्रकार नवेद का यह चर्चित पोस्ट

लखनऊ । यूपी हज समिति के कार्यालय को भगवा रंग में रंगने के बाद सोशल मीडिया पर सियासत शुरू हो गयी है । कोई इसे भाजपा सरकार की हठधर्मिता बता रहा है तो कोई भगवा कलर को ही इस्लाम का वास्तविक कलर बता रहा है । लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार नवेद शिकोह ने अपने फेसबुक पर भगवा कलर को इस्लामी कलर बताते हुए पोस्ट डाला है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है । आप भी पढ़िए यह पोस्ट-

“सही माइने में इस्लामी रंग हरा नहीं गेरुआ यानी भगवा है। इस्लाम का मूल्य उद्देश्य तोड़ना नहीं जोड़ना है। नफरत नहीं मोहब्बत है। मौत नहीं जिन्दगी है। हिंसा नहीं शान्ति है। विध्वंस नहीं अमन है। बंटवारा नहीं एकता है। इस्लाम के इस मूल उद्देश्य को सूफिइज्म की गेरुआ यूनिवर्सिटी ही सिखाती है। सूफिइज्म यानी सूफी विचारधारा भारत में हिन्दू-मुसलमान के बीच सेतु का काम भी करती है। सूफिइज्म का हज़ारों सालों से गेरुआ ही रंग है। यही कारण है कि सूफी मुगलों के बनायी गयी हर इमारत का रंग गेरूआ/सूफी/इस्लामी है।

दर अस्ल इस्लाम का उदय खाड़ी देशों मे हुआ था। इन रेतीले देशों में पानी और हरियाली की बहुत कमी थी। क्योंकि अरब का इंसान हरियाली को तरसता था इसलिए हरे रंगों का इस्तेमाल ज्यादा करता था। यही कारण है कि उस समय मुस्लिम धार्मिक स्थल भी हरे रंग के थे। जिसे देखा देखी आज भी मुसलमान अपने धार्मिक स्थलों को हरा रंगदारी हैं। लेकिन अस्ल मायने में इस्लामी रंग गेरूआ /भगवा ही है। ”

– नवेद शिकोह (स्वामी नवेदानंद)
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