सिपाही अंकित की शहादत से व्यथित हैं IPS अजय, लिखा-‘सब लड़ाईयां जीत कर हम एक जंग हार गए’

लखनऊ । शामली में दुर्दांत बदमाश से हुई मुठभेड़ में शहीद हुए सिपाही अंकित तोमर की शहादत से शामली के कप्तान अजयपाल शर्मा व्यथित हैं । उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर भावुक संदेश लिखा है । जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है । पढ़िए उनका यह फेसबुक पोस्ट-

“एक शाम को एक फ़ोन कॉल ,सूचना एक बड़े दुर्दांत अपराधी की जिसका गैंग 3 पुलिस कर्मियों की हत्या कर चुका था।जो पिछले 7 महीने से जेल ले जाते वक्त पुलिस कस्टडी से जनपद बाराबंकी से फरार हो गया था।
कुछ साल पहले एक व्यापारी से रंगदारी मांगी और न देने पर दो भाइयों की हत्या बीच बाजार कर फरार हो गए।अपने खिलाफ मुखबिरी करने वालो को मौत की नींद सुला दिया। 12 मुक्कदमे हत्या के और 68 कुल जिस में 10 करोड़ की तनिष्क डकैती के साथ साथ अथाह अन्य।
सूचना जब मिली तब मैं एक संस्था के नव वर्ष के कार्यक्रम में शरीक हो रहा था।उसे बीच छोड़ उपज तीन विश्वसनीय टीमों को एक जगह इक्कठा किया।
दबिश जब भी कोई पुलिस कर्मी देने जाता है तो उसके अंदर सिर्फ एक ही सोच होती है कि वो अपराधि जो समाज के लिए खतरा बना हुआ है किसी प्रकार उसको गिरफ्तार कर सके। उस वक़्त उसके लिए उसके परिवार से ज्यादा समाज है।अगर वो ऐसा न सोचें तो शायद वो कभी ऐसे अपराधी को न पकड़ पाए।
दबिश के लिए तैयारी की गई।रणनीति बनाई गई।मौके पर पहुंचे।लगभग 10 बजे अंधेरे में पहुंच सब ने अपनी पोजीशन ली। एक टीम जिस में जांबाज़ सिपाही अंकित था वो उस कमरे को कवर करने पहुंची और दोनों तरफ से गोलियां चली।अंकित के सिर में गोली लग चुकी थी।वो ज़मीन पर गिरा ।उस वक़्त शायद उसके मन मे अपने मां बाप व पत्नी,4 साल की बच्ची और 4 माह के बेटे का ख्याल ज़रूर आया होगा क्यों कि शायद उन कुछ पलों के बाद उसके दिमाग की खून की सप्लाई बंद हो गयी थी।बदमाश के भी गोली लगी लेकिन उसने कूद के भागने की कोशिश की।जहां हम लोग जगह लिए हुए थे।वहां गोलियां दोनो तरफ से चल रही थी।जिस में बदमाश मारा गया लेकिन मरते मरते एक और जांबाज़ को घायल कर दिया लेकिन किस्मत से ये जांबाज़ खतरे से बाहर आ चुका है।

अपने साथियों को हम ले कर हॉस्पिटल पहुंचे लेकिन अंकित 24 घंटे ज़िन्दगी और मौत के बीच संघर्ष कर के शहीद हुआ। यह पुलिस कर्मी के कर्तव्य पे पथ पर चलते हुए सबसे बड़ा बलिदान था। अपनी टीम के सदस्य को खोना बोहोत बड़ा नुकसान है। एक कप्तान के लिए अपने साथी के शव को कन्धा देना वैसा ही है जैसे एक बाप अपने बेटे को ।
ये दुख महसूस करना बहुत भारी था।
जैसे सब लड़ाईयां जीत कर हम एक जंग हार गए।
भगवान उसकी आत्मा को शांति दे।
You are etched in the memory of your team ankit ??”