भारत के राष्ट्रपति के लिए द्रौपदी मुर्मू का नाम भी चर्चा में

नई दिल्ली। अगले राष्ट्रपति के संभावित उम्मीदवारों में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुषमा स्वराज,सुमित्रा महाजन जैसे बड़े दिग्गज़ नेताओं के साथ-साथ द्रौपदी मुर्मू का भी नाम सामने आ रहा है। राष्ट्रपति चुनावों में झारखंड की राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रीय जनतांत्रिक गंठबंधन (एनडीए) की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हो सकती हैं। यदि भाजपा ने द्रौपदी मुरमू को अपना प्रत्याशी बनाया, तो झारखंड की मुख्य विपक्षी पार्टी झारखंड मुक्ति मोरचा (झामुमो) का भी समर्थन उसे हासिल हो सकता है।
झारखंड विधानसभा में झामुमो मुख्य विपक्षी पार्टी है। उसी जनाधार की आजसू पार्टी भाजपा गठबंधन की सरकार में पार्टनर है। संयोग से द्रौपदी झारखंड और देश की पहली आदिवासी महिला राज्यपाल हैं। द्रौपदी को प्रत्याशी बना कर भाजपा और सरकार देश को अलग संदेश दे सकती है। महिला और स्वच्छ छवि के चलते विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी दौड़ में हैं, लेकिन उनकी सेहत ठीक नहीं होने की वजह से उनकी दावेदारी कमजोर पड़ गयी है।

दक्षिण के पिछड़ी जाति के नेता और केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू को भी दौड़ में माना जा रहा है, लेकिन उनके नाम पर विपक्ष सहमत होगा, इस पर भाजपा को संदेह है। इन परिस्थितियों में द्रौपदी मुरमू की दावेदारी अधिक मजबूत और तार्किक बतायी जा रही है। मुर्मू के राजनितिक जीवन की शुरुआत 1997 में हुई जब वो पहली बार स्थानीय पार्षद चुनी गई लेकिन अब जब से उनका आम राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हुआ है तो लोगो को आश्चर्य हो रहा है कि किस तरह एक आदिवासी महिला पार्षद से लेकर राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने की दौड़ में शामिल हुई।

मुर्मू की ये जीवन यात्रा देश की तमाम आदिवासी महिलाओं के लिए प्रेरणा है। हालांकि मुर्मू एक ऐसे राज्य से ताल्लुक रखती हैं, जहां मोदी लहर के बावजूद भी भाजपा महज एक सीट जितने में कामयाब रही थी।

द्रौपदी मुर्मू पहली उड़िया नेता हैं जो राज्यपाल बनीं 
द्रौपदी मुर्मू पहली उड़िया नेता हैं जिन्हें किसी भारतीय राज्य की राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वर्ष 2000 से 2005 तक उड़ीसा विधानसभा में रायरंगपुर से विधायक तथा राज्य सरकार में मंत्री भी रही हैं। भाजपा और बीजू जनता दल की गठबंधन सरकार में 6 मार्च 2000 से 6 मार्च 2002 तक द्रौपदी मुर्मू वाणिज्य और परिवहन के लिए स्वतंत्र प्रभार की राज्य मंत्री तथा 6 अगस्त 2002 से 16 मई 2004 तक मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री रहीं।

द्रौपदी मुर्मू का राजनीतिक सफर

-18 मई, 2015 से झारखंड की राज्यपाल हैं
-2000 से 2004 तक ओड़िशा विधानसभा में रायरंगपुर से विधायक और राज्य सरकार में मंत्री रहीं
-पहली ओड़िया नेता हैं, जिन्हें राज्यपाल बनाया गया
-छह मार्च, 2000 से छह अगस्त, 2002 तक भाजपा और बीजू जनता दल की गंठबंधन सरकार में वाणिज्य और परिवहन के लिए स्वतंत्र प्रभार मंत्री रहीं
-छह अगस्त, 2002 से 16 मई, 2004 तक मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री रहीं
-एजेंसी