जीवन में खुश रहना चाहते हैं तो चाणक्य की इन बातों का करें अनुसरण

आचार्य चाणक्य जिनकी नीतियां और ज्ञान मनुष्य जीवन को सफल बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं। चाणक्य ने अर्थशास्त्र, राजनीति और अर्थनीति जैसे महान ग्रंथों की रचना की है। साथ ही वह एक महान कूटनीतिज्ञ भी थे। इन्होंने अपनी नीतियों से ही नंदवंश का अंत करके मौर्यवंश की स्थापना कर चंद्रगुप्त मौर्य को गद्दी पर बैठा दिया था। कहा जाता है कि इनकी नीतियों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन की हर समस्या का सामाधान कर सकता है।

यहां हम जानेंगे चाणक्य की किसी भी रिश्ते को लेकर क्या नीतियां थी और किन रिश्तों का त्याग करना उन्होंने बेहतर बताया है-

  1. चाणक्य नीति अनुसार ऐसे धर्म का पालन करना कष्टदायी होता है। जिसमें दया के लिए कोई स्थान न हो। जो धर्म दूसरों के लिए दया का भाव रखना नहीं सिखाता हो और जिसके पालन से आपसी सौहार्द में कमी आती हो, ऐसे धर्म का त्याग कर देना ही अच्छा विकल्प होता है।
  2. चाणक्य अनुसार गुरु वही होता है जो अपने में ज्ञान का सागर समेटे हुए है। ऐसे गुरु जिनकी कथनी और करनी में अंतर हो मतलब जो शिक्षा वह अपने शिष्यों को देते हैं वह सीख उनके आचरण में न दिखाई दे, ऐसे गुरु का त्याग कर देना चाहिए।
  3. ऐसा पति जो हमेशा गुस्से में रहता हो और हर बात पर चीखता-चिल्लाता हो, जिससे परिवार का माहौल सही नहीं रह पाता हो, बच्चों का पालन-पोषण और बेहतर भविष्य जिसकी प्राथमिकता न हों, ऐसे पति का त्याग कर देना चाहिए। ताकि अपनी और बच्चों की जिंदगी को बेहतर बनाया जा सके।
  4. इसी तरह से ऐसी पत्नी जिसके मुह से हर समय अपशब्द और क्रोध ही निकलता हो। जो घर में कलह का माहौल बनाए रखे ऐसी पत्नी का त्याग कर देने में ही भलाई है। क्योंकि ऐसी पत्नी के साथ से आप खुद नकारात्मक हो जाएंगे और परिवार की तरक्की में बाधा उत्पन्न होने लगेंगी।