GST ​की वार से फीकी हुई सोने की चमक, वेडिंग सीजन पर भी आया असर

गोल्ड काउंसिल ने अपनी एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी है परिषद के मुताबिक पिछले साल जुलाई से स‍ितंबर के बीच सोने की मांग 193 टन रही परिषद ने इसके लिए जीएसटी को जिम्मेदार ठहराया है।

भारत में सोने की मांग में काफी बड़ी गिरावट आई है 2017 की तीसरी तिमाही में सोने की मांग 24 फीसदी गिरकर 145.9 टन रही है वर्ल्ड
परिषद ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सोने की मांग घटने की सबसे अहम वजह जीएसटी का लागू होना है इसके अलावा मनी लॉन्ड्रिंग कानून को अमल में लाए जाने से भी खरीदारों ने सोने से दूरी बनाई।

समीक्षावध‍ि में मूल्य के आधार पर सोने के आभूषणों की मांग 31% घटकर 30,340 करोड़ रुपये रही है यह पिछले साल 2016 में इसी दौरान 43,880 करोड़ रुपये थी।
सितंबर तिमाही के दौरान सोने के निवेश में भी कमी आई है इस दौरान कुल निवेश की मांग 23 फीसदी घटकर 312 टन रही जो पिछले साल इसी दौरान 40.1 टन थी। मूल्य के आधार पर देखें तो इसमें 29% की गिरावट देखी गई और यह 8,200 करोड़ रुपये रहा पिछले साल इसी अवध‍ि में यह 11,520 करोड़ रुपये था।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के भारत में प्रबंधक निदेशक सोमसुंदरम पी.आर. ने कहा कि सोने की मांग में आई इस गिरावट के लिए जीएसटी जिम्मेदार है उनके मुताबिक इसके लिए आभूषण के खुदरा लेनदेन को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग कानून को लागू किए जाने से भी मांग पर असर पड़ा है उन्होंने बताया कि पहली तीन तिमाहियों में आभूषणों की मांग बढ़ी लेकिन उसके बाद इसमें गिरावट आ गई सोने की छड़ और सिक्कों की मांग की बात करें तो वह भी 23 फीसदी घटकर 31 टन रह गई है।

सोमसुंदरम ने कहा कि साल 2017 में सोने की मांग 650 से 700 टन रहने का अनुमान है उनके मुताबिक यह 5 वर्ष के औसत से भी कम है उन्होंने उम्मीद जताई है कि साल 2018 में सोने की मांग बढ़ने की उम्मीद है।