सरकारी और निजी स्कूलों में ट्यूशनखोर शिक्षक कर रहे छात्रों का शोषण, शिक्षा विभाग मौन

नये शैक्षिक सत्र की शुरूआत होते ही क्षेत्र में ट्यूशनों के बाजार जोेर-शोर से लगने लगे हैं। स्कूल में जहां छात्र-छात्राओं पर ट्यूशन के लिए दबाव बनाये जाने की कोशिश जारी है। वहीं गली-कूचों में स्थापित कोचिंग सेन्टर जमकर प्रचार-प्रसार करने में लगेे है। शैक्षिक सत्र की शुरूआत होते ही विद्यालयों में प्रवेश का सिलसिला शुरू हो गया।  स्कूलों में प्रवेश सहित अन्य मदों में भारी भरकम फीस वसूली जा रही है। इसके साथ ही कोचिंग सेन्टर स्वयं को सर्वश्रेष्ठ घोषित करते हुए पर्चे पोस्टर व एनाउन्समेन्ट कराकर ज्यादा से ज्यादा बच्चों को बटोरने की कोशिश में लगे हुए हैं। जिले के कस्बों में स्थित स्कूलों में बेहतर शिक्षा का दावा करने के साथ-साथ अध्यापक अभिभावकों से ट्यूशन पढ़वाने पर भी जोर दे रहे है।

शहर के अधिकतर निजी विद्यालयों में इस बार जहां फीस में इजाफा किया गया है। वहीं स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों से प्रवेश के नाम पुनः मोटी रकमे वसूली गयी जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक भार पड़ा है। कान्वेंट स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का शोषण इस कद्र बढ़ गया है कि स्कूल की टीचरे घर पर भी स्कूल जैसा माहौल बनाकर बच्चों को पढ़ा रही हैं और उनसे मोटी रकम ले रही है। अधिकतर कान्वेंट स्कूलों में बच्चों को पूरा बस्ता वहीं से दिया गया है। जिस पर अभिभावकों को 30 प्रतिशत से अधिक का भुगतान स्कूल को करना पड़ा है। कापी किताब, बेल्ट, मोजे बस्ते हर जगह कमीशन की दुकाने सजीं हैं। एक निश्चित दुकान से समान खरीदने के लिए स्कूल टोकन दे रहे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी द्वारा ट्यूशन के धंधे पर अंकुश लगाये जाने के सारे दावे खोखले बने हैं। सरकारी शिक्षक खुलेआम ट्यूशन पढ़ाकर हजारों कमा रहे है।