अदरक बदलते मौसम में कई रोगों को रखता है दूर, जरूर बरतें ये सावधानियां-

आयुर्वेद के अनुसार अदरक एक ऐसी औषधि है, जो खाने में स्वाद बढ़ाने के साथ ही कई बीमारियों से दूर रखने में भी काफी मददगार है। ऐसे में आइए जानते हैं बदलते मौसम में आपके पेट को दुरुस्त रखने के अलावा अदरक सेहत के लिए कैसे वरदान है। 

पेट के रोगों को ठीक करें अदरक-
भोजन पचने में दिक्कत आए तो अदरक को पीसकर इसके रस को घी या शहद के साथ लेना चाहिए। कई बार भोजन ठीक से न पचने पर पेट में गैस के कारण पेट व सीने में दर्द, भारीपन, ऐंठन, एसिडिटी और दस्त जैसी समस्या हो जाती है। अदरक के सेवन से पाचन क्रिया ठीक होती है। अदरक, काली मिर्च और छोटी पीपली का चूर्ण बराबर भाग में मिलाकर दो ग्राम मात्रा में पुराने गुड़ के साथ मिलाएं। इसके सेवन से फेफड़ों और पेट के रोगों के उपचार में लाभ होता है। भोजन से पहले यदि अदरक का सेवन सेंधा नमक के साथ किया जाए, तो भूख भी बढ़ती है।

सिरदर्द में राहत दिलाए-
सिरदर्द होने पर अदरक के चूर्ण या इसके रस को गर्म पानी में मिलाकर हल्दी के साथ सिर पर इसका लेप करने से लाभ मिलता है। सर्दी के मौसम में पेट या दांत में दर्द होने पर अदरक को चबाकर खाने से तत्काल लाभ मिलता है। दांत के दर्द में अदरक को लौंग के साथ चबाकर खाना चाहिए।

जॉन्डिस में लाभकारी-
जॉन्डिस में अदरक, त्रिफला और गुड़ को साथ मिलाकर सेवन करना चाहिए।

जोड़ों के दर्द में-
अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो आथ्र्राइटिस यानी जोड़ों के दर्द में राहत दिलाता है। पुराने जोड़ों के दर्द में अदरक का रस, अश्वगंधा चूर्ण, शैलाकी चूर्ण, हल्दी का चूर्ण बराबर-बराबर भाग में मिलाकर शहद के साथ सेवन कर बाद में गर्म दूध, चाय या गर्म पानी पीने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है।

सर्दी, जुकाम, बुखार में फायदेमंद-
खांसी, जुकाम, गले में खराश, गला बैठने जैसी स्थिति में अदरक को पीसकर घी या शहद के साथ लेना चाहिए। हिचकी आने पर अदरक के रस का सेवन शहद व तुलसी के साथ करें। सांस के रोगी को शहद के साथ इसका रस देने से कफ पतला होता है, जिससे आराम मिलता है।

अदरक की चाय-
खासतौर पर ठंड के मौसम में अदरक व काली मिर्च के पांच दाने मिला कर तैयार की गई चाय पीने से लाभ होता है।

-बरतें सावधानी-
-ठंडी प्रकृति वाले लोगों को अदरक लाभ पहुंचाता है लेकिन जिन्हें अधिक गर्मी लगती हो या जो पित्त प्रकृति के हों तो उन्हें अदरक से बचना चाहिए।
-हृदय और किडनी के पुराने रोगियों के लिए भी यह नुकसानदायक होती है।