फिरोज गांधी और इंदिरा गांधी की शादी का क्या किस्सा है ? जनिये…..

नई दिल्ली। इंदिरा गांधी से जुड़े ऐसे किस्से जो बहुत कम लोग जानते होंगे जिससे पता चलेगा कि उन्होंने अपनी दृढ़ता का परिचय सिर्फ अपने राजनीतिक फैसले लेकर ही नहीं दिया बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी उतनी ही मजबूत ‌इरादों में से थीं
भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि 31 अक्टूबर यानी आज है इंदिरा गांधी को भारतीय राजनीति के इतिहास में एक बेहद मजबूत इरादों वाली राजनेता के रूप में जाना जाता है इस मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं आइए सबसे पहले जानते हैं इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी की

शादी का किस्सा…
बर्टिल फलक की प्रकाशित किताब ‘Feroze the forgotten gandhi’ में इंदिरा गांधी और फिरोज के संबंधों को लेकर कई खुलासे किए इस किताब का रिव्यू करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नटवर सिंह ने ‌लिखा- इंदिरा गांधी फिरोज से जब मिली तब वह 13-14 साल की थीं उस वक्त फिरोज की उम्र 16 साल थी फिरोज ने उस वक्त कई बार इंदिरा को प्रपोज किया लेकिन तब छोटी उम्र होने के चलते ऐसा मुंमकिन नहीं हो पाया।
जब दोनों की मुलाकात पेरिस में हुई तो दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया दोनों ने लंदन में एक ही कॉलेज में पढ़ाई भी की लेकिन दोनों के रिश्ते से इंदिरा के पिता जवाहरलाल नेहरू को एतराज था इंदिरा गांधी ने नेहरू जी के विरोध में जाकर शादी कर ली 1942 में जब भारत छोड़ो आंदोलन चल रहा था तब उन्होंने फिरोज से शादी कर ली महात्मा गांधी ने फिरोज को पहले अपना सरनेम गांधी दिया था जो आज भी गांधी परिवार का सरनेम है।
बचपन बीता आजादी की लड़ाई में

बचपन से ही इंदिरा गांधी का राजनीति और भारत छोड़ों आंदोलन में लग चुकी थीं उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में भी कहा था कि उनकी कोई सहेली नहीं रही बस कजिन्स थे जिनसे वो ज्यादा बातें होती थीं स्कूल में उनके कई दोस्त बने लेकिन उन्हें लड़कियों के साथ गॉसिप करना पसंद नहीं था तो वहां भी वो दोस्तों से दूर ही रहती थीं उन्हें माता-पिता के साथ समय बिताना बहुत अच्छा लगता था उनके साथ समय इंदिरा को बहुत कम मिल पाता था क्योंकि नेहरू आजादी की लड़ाई में व्यस्त रहते थे और उन्होंने काफी वक्त जेल में भी बिताया था।
इंदिरा के पीएम बनाने जाने पर अमेरिका हुआ हैरान

इंदिरा गांधी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी तो अमेरिका हैरान हो गया इंदिरा की बुआ कृष्णा ने अपनी किताब डियर टू बीहोल्ड में लिखा- भारत ने एक महिला को देश का मुखिया के रूप में चुना इस पर अमेरिका ही नहीं दुनिया दंग थी लेकिन जब इंदिरा पहली बार अमेरिका गईं तो पूरा अमेरिका दंग था अमेरिकन प्रेस ने उस वक्त उनको पूरी तवज्जो दी और वो दौरा उनका बहुत अच्छा रहा।
1971 युद्ध और बांग्लादेश का उदय

1971 के उस वक्त की जब पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तान सरकार और सेना अपने नागरिकों पर जुल्म कर रही थी जिससे वहां के नागरिक अपने सेना के खिलाफ ही विद्रोह कर रहे थे यही नहीं वो भारतीय सीमा में दाखिल हो रहे थे आकड़ों के मुताबिक करीब 10 लाख शरणार्थियों की वजह से भारत में अशांति का माहौल पैदा हो गया था पाकिस्तान भी भारत को लगातार धमकियां दे रहा था।