इस देश की जान बख्श दो, प्रभु ! पढ़िए हत्यारे रेल मंत्री को आईना दिखता पूर्व IPS ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल

देश की सरकार ने देश की रेल को कत्लगाह बना कर रख दिया है। सरकार के तीन साल के कार्यकाल में डेढ़ दर्ज़न से ज्यादा गंभीर रेल दुर्घटनाओं में तीन सौ से ज्यादा लोग मारे गए और हज़ारों लोग घायल हुए हैं। छोटी-मोटी दुर्घटनाओं की संख्या सैकड़ों में पहुंचती हैं। इनमें से ज्यादा दुर्घटनाएं रेल के अफसरों और कर्मचारियों की लापरवाही से घटी हैं। मुज़फ्फर नगर के पास खतौली में कल की भीषण दुर्घटना भी रेल कर्मचारियों की अक्षम्य लापरवाही का नतीजा है। रेल पटरी की मरम्मत का काम चल रहा था और इसकी खबर ट्रेन के ड्राईवर तक को नहीं थी कि वह समय रहते ट्रेन की रफ़्तार धीमी कर सके। वर्तमान सरकार में रेल के आधुनिकीकरण के नाम पर जिस रफ़्तार से रेल के टिकटों के दाम बढाए जाते रहे हैं, रेल दुर्घटनाओं की संख्या भी उसी रफ़्तार से बढ़ी है। हर दिन रेल में सफ़र करने वाले लाखों यात्रियों की जान हत्यारे रेल मंत्रालय के रहमोकरम पर है। हर दुर्घटना के बाद उच्चस्तरीय जांच का नाटक होता है, लेकिन कोई भी जांच शायद ही किसी तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचती है। इस बार भी कुछ छोटे-मोटे कर्मचारी गिरफ्तार और निलंबित होंगे, लेकिन रेल की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए ज़िम्मेदार मंत्री और बड़े अफसर हमेशा की तरह साफ़ बच निकलेंगे। रेल मंत्रालय के पास अमीरों के हित में बुलेट ट्रेन चलाने के लिए लाखों करोड़ रुपयों का बजट है, लेकिन रेल की पटरियों और सुरक्षा-व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए कुछ हज़ार करोड़ का इंतजाम नहीं। कोई तो बताए कि देश के अबतक के सबसे नाकारा, जनविरोधी और हत्यारे रेल मंत्री सुरेश प्रभु को देश की जान बख्शने के लिए अभी कितने और रेल यात्रियों की बलि चाहिए ?

कुर्सी है तुम्हारी, ये जनाज़ा तो नहीं है
कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते !
(इरतिज़ा निशात)

-धुव गुप्त पूर्व आईपीएस के फेसबुक वाल से