सच्चे शिक्षक की खोज है तो आंख मूंद कर ब्याह कर लें ! पढ़िए ध्रुव गुप्त का यह आर्टिकल

आज शिक्षक दिवस पर स्कूल, कॉलेज और जीवन के विभिन्न चरणों में मिले शिक्षकों की याद आई। सबने कुछ न कुछ सिखाया ही था, लेकिन उनमें जिस एक का हमारे व्यक्तित्व और जीवन पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा, उसे चुनना बड़ा मुश्किल काम था। अथक चिंतन का निष्कर्ष अंततः यह निकला कि जीवन की सबसे बड़ी शिक्षक हमारी-आपकी पत्नियां ही होती हैं। ब्याह तक आपने अपने शिक्षकों और किताबों से जितना भी ज्ञान हासिल किया हो, ब्याह के बाद घरवाली के ज्ञान के आगे सब दो कौड़ी का हो जाता है। अच्छे शिक्षक की तरह पहले वह आपके मन-मष्तिष्क में भरा जीवन भर का अर्जित ज्ञान धो-पोंछ कर साफ़ करेगी और फिर उसमें योजनाबद्ध रूप से भूसा भरेगी। किश्तों में पंख काटेगी और देखते-देखते उड़ाकू से पालतू बना डालेगी। धैर्य और स्टैमिना भी अद्भुत होता है पत्नियों का। सुबह नींद से जगाने से लेकर देर रात सुलाने तक उनका क्लास निरंतर चलता रहता है। आपके उठने-बैठने, चलने-फिरने, पहनने-ओढ़ने, हंसने-बोलने, लिखने-पढने – सबमें खोजकर कमियां निकालेगी और ठोक-पीटकर उन्हें दूर करेगी। अपनी बातों के समर्थन में ऐसे इमोशनल और अश्रु-विगलित तर्क देगी कि आप चाहकर भी उनका प्रतिकार न कर सकें।

कहते हैं कि स्वयं को अज्ञानी समझना अच्छे छात्र की सबसे बड़ी पहचान है। इस भरी दुनिया में एक वही है जो हर पल आपको अपनी तुच्छता और मूर्खता का अहसास दिलाती चलती है। सो आपको अगर अच्छे और सच्चे शिक्षक की खोज है तो आंख मूंद कर ब्याह कर लें ! शादीशुदा हैं तो समर्पण कर दें घर में मौज़ूद शिक्षिका के आगे। कृपा आनी शुरू हो जाएगी।

अपनी वाली सहित संसार की सभी पत्नियों को शिक्षक दिवस पर शत-शत नमन !

-लेखक ध्रुव गुप्त पूर्व आईपीएस हैं |