इलेक्शन 2022: कांग्रेस ने अखिलेश-शिवपाल के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारे

लखनऊ। कांग्रेस ने मैनपुरी की करहल सीट से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और इटावा की जसवंतनगर सीट से प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया व सपा-प्रसपा गठबंधन के उम्मीदवार शिवपाल सिंह यादव के खिलाफ उम्मीदवार उतारने से परहेज किया है। ऐसा करके कांग्रेस ने भविष्य में भाजपा के खिलाफ जरूरत पड़ने पर समाजवादी पार्टी से हाथ मिलाने का स्पष्ट संकेत दिया है। हालांकि, कांग्रेस ने करहल सीट पर पहले अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था, लेकिन मंगलवार को नामांकन करने से रोक दिया।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर पार्टी के चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी हैं। यह बात और है कि कांग्रेस ने सपा मुखिया अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव के खिलाफ अब प्रत्याशी नहीं उतारने का निर्णय किया है। चुनाव की आहट तेज होते ही कांग्रेस और सपा के गठबंधन की अटकलों को अखिलेश ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि बड़े दलों का स्ट्र्राइक रेट खराब होता है। उनका इशारा कांग्रेस के साथ 2017 में हुए सपा के गठबंधन की ओर था। सपा और कांग्रेस दोनों का मुख्य लक्ष्य भाजपा को हराना है।

बीते दिनों एक सवाल के जवाब में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा था कि विधान सभा चुनाव के बाद यदि सपा को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की जरूरत पड़ी तो इस पर विचार किया जाएगा। कांग्रेस के इस कदम को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।

हालांकि, इस बारे में कांग्रेस के मीडिया व कम्युनिकेशन विभाग के चेयरमैन नसीमुद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ रायबरेली और अमेठी में कभी प्रत्याशी नहीं उतारा। राजनीतिक शिष्टाचार को निभाते हुए कांग्रेस ने भी अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव के खिलाफ उम्मीदवार नहीं खड़ा किया है। उन्होने यह भी कहा कि कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य भाजपा को हराना है। भाजपा के खिलाफ करहल और जसवंतनगर सीटों पर लड़ाई कमजोर न हो, इसलिए भी पार्टी ने दोनों सीटों पर उम्मीदवार खड़ा करने से परहेज किया है।