अलीगढ : DS कालेज के अय्याश प्रोफेसर की करतूत, खुद को बचाने के लिए छात्रनेता का लगाया फर्जी शपथपत्र, कार्यवाही की मांग

अलीगढ | सितम्बर माह में डीएस कालेज के पूर्व प्रॉक्टर और रसायन विभाग के हेड रहे डॉ सुभाष चौधरी के छात्रा से बातचीत के ऑडियो वायरल होने से प्रैक्टिकल में नंबर बढ़वाने और छात्राओं के उत्पीड़न का खुलासा हुआ था | कालेज ने जांच समिति बिठाई तो कालेज स्तर से कार्यवाही भी हुई लेकिन अब सुभाष चौधरी द्वारा खुद को बचाने के लिए जाँच समिति के समक्ष लगाए गए फर्जी शपथपत्र से हड़कंप मच गया है | प्रोफ़ेसर ने खुद को बचाने के लिए  पूर्व छात्र नेता और वर्तमान में अधिवक्ता जियाउर्रहमान एडवोकेट का फर्जी शपथपत्र लगाकर जांच समिति को गच्चा देने की कोशिश की लेकिन जियाउर्रहमान के संज्ञान में मामला आने से भेद खुल गया और एकबार फिर कालेज में यह प्रकरण उछल गया है | जियाउर्रहमान ने मीडिया से वार्ता कर शपथपत्र को फर्जी और जालसाजी करार देते हुए बड़ा षड्यंत्र बताया है | साथ ही कालेज में शपथपत्र देने वाले शख्स की जाँच करने और फर्जी शपथपत्र देने वालो के खिलाफ विधिक कार्यवाही की मांग की है |

छात्रराजनीति के दिग्गज रहे अधिवक्ता जियाउर्रहमान ने बताया कि  फर्जी शपथपत्र की जानकारी जैसे ही मिली, तो पत्र लिखकर सचिव महोदय से उसकी प्रति मांगी | कालेज के सचिव ने शपथपत्र की प्रति भेजती तो मैं स्वंय अचंभित रह गया | उन्होंने कहा कि पूर्ण रूप से फर्जी शपथपत्र अय्याश प्रोफ़ेसर ने खुद को बचाने के लिए दाखिल किया है जो कि संगीन अपराध है | उन्होंने कहा कि जांच समिति को दाखिल किये गए फर्जी शपथपत्र में कथित हस्ताक्षर फर्जी हैं और नाम गलत लिखा हुआ है | उन्होंने बताया कि   उक्त शपथपत्र 100 रूपये के स्टाम्प पर बनाया गया है, जबकि नोटेरी का शपथपत्र 10  रूपये के स्टाम्प पर बनता है | उन्होंने कहा कि शपथपत्र/घोषणापत्र के अवलोकन से यह स्पष्ट नहीं है कि उक्त दस्तावेज माफीनामा है, घोषणापत्र है या शपथपत्र है | जबकि वह खुद अधिवक्ता हैं जो ऐसी गलती नहीं करेंगे और शपथपत्र बनाना अच्छी तरह से जानते हैं |

जियाउर्रहमान ने यह भी कहा कि उक्त फर्जी दस्तावेज का गहनता से अवलोकन किया जाये तो जिन अधिवक्ता द्वारा कथित हस्ताक्षर  शिनाख्त  किये गए हैं,  उनके हस्ताक्षर के नीचे मोहर व अधिवक्ता पंजीकरण संख्या नहीं है और  दस्तावेज पर दिखाए गए साक्षीगण षड्यंत्र के तहत बनाये गए हैं | जबकि शपथपत्र में साक्षीगण की आवश्यकता नहीं होती है, जबकि सत्यापन किया जाता है | दर्शाये गये साक्षीगण सुभाष चौधरी के षड्यंत्र का हिस्सा है | उन्होंने कहा कि शपथपत्र पर लगाया गया फोटो सोशल मीडिया से उपलोड कर लगाया गया है  | फर्जी शपथपत्र के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि उक्त शपथपत्र नोटेरी द्वारा नहीं बनाया गया है क्योंकि उसपर न तो नोटेरी की मोहर है जिसपर यह वर्णित होता है कि शपथपत्र किसका है तथा किस अधिवक्ता के द्वारा शपथकर्ता के हस्ताक्षर की शिनाख्त की गयी है | जबकि शपथपत्र पर अटेस्टेड लिखा हुआ |

उन्होंने कहा कि न कभी संलग्न कथित स्टाम्प ख़रीदा है, न स्टाम्प वेंडर को जनता है | न ही शपथपत्र पर दर्शाये गए अधिवक्ता को जानता है , न ही नोटेरी के अधिवक्ता को जानता है | उन्होंने कहा कि व्यवसायिक  रूप से अधिवक्ता है तो वो सही तरीके से शपथपत्र बनाना जनता है, उक्त दस्तावेज पर न तो सत्यापन है और न ही यह घोषणापत्र की श्रेणी में आता है |जियाउर्रहमान एडवोकेट ने प्रबंध समिति से पूरे प्रकरण की  जांच कराने और फर्जी शपथपत्र लगाने वालो पर विधिक कार्यवाही करने की मांग की है  | उन्होंने कहा कि फर्जी शपथपत्र लगाने वाले अपराधियों और जालसाज अय्याश प्रोफेसर सुभाष चौधरी पर एफआईआर भी दर्ज कराएँगे |  इस अवसर पर छात्र नेता किरनपाल सिंह , नफीस अहमद, सूरज सिंह आदि मौजूद रहे ।